एनडीए की उम्मीदवार द्रोपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति पद के लिए भरा नामांकन

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एनडीए की उम्मीदवार द्रोपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति पद के लिए भरा नामांकन

-मोदी-शाह समेत 8 बड़े दिग्गज नेता बने प्रस्तावक, बीजेडी और वाईएसआर के कई नेता रहे मौजूद - द्रोपदी मुर्मू ने सोनिया गांधी, ममता बैनर्जी व शरद पवार से मांगा समर्थन

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/- झारखंड की पूर्व राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने आज एनडीए की ओर से राष्ट्रपति पद के लिए अपना नामांकन दाखिल कर दिया है। इस मौके पर पीएम मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह के अलावा बीजू जनता दल और वाईएसआर कांग्रेस के नेता भी मौजूद रहे। द्रौपदी मुर्मू ने 4 सेटों में नामांकन दाखिल किया गया। नामांकन से पहले द्रोपदी मुर्मू ने सोनिया गांधी, ममता बैनर्जी व शरद पवार से भी समर्थन मांगा है। हालांकि, इस बीच यह चर्चा भी शुरू हो गई है कि क्या द्रौपदी मुर्मू राष्ट्रपति पद के लिए निर्विरोध ही चुन ली जाएंगी।
             द्रौपदी मुर्मू की राष्ट्रपति उम्मीदवारी के लिए पीएम मोदी, अमित शाह, राजनाथ सिंह, जेपी नड्डा, ललन सिंह, पशुपति पारस, रेणु देवी और तारकिशोर प्रसाद प्रस्तावक रहे। नामांकन दाखिल करने से पहले मुर्मू ने संसद में महात्मा गांधी, डॉ अंबेडकर और बिरसा मुंडा की मूर्तियों पर श्रद्धांजलि अर्पित की। 29 जून को नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख है।
             द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के शरद पवार और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सहित प्रमुख विपक्षी नेताओं को फोन किया। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने नामांकन से पहले व्यक्तिगत रूप से सभी से बात की और समर्थन मांगा। हाल तीनों बड़े नेताओं ने उन्हें अपनी शुभकामनाएं दीं।
              इससे पहले गुरुवार को द्रौपदी मुर्मू च्ड मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री शाह और ठश्रच् अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की। इसके बाद केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी के घर पर राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के नामांकन के लिए प्रस्तावक और समर्थक के तौर पर नॉमिनेशन पेपर पर हस्ताक्षर किए गए।
             आंध्र प्रदेश के सीएम जगनमोहन रेड्डी ने गुरूवार को ऐलान किया है कि उनकी पार्टी राष्ट्रपति चुनाव में छक्। की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू का समर्थन करेगी। सीएम जगन का मानना है कि मुर्मू का समर्थन करना एससी, एसटी, बीसी और अल्पसंख्यक समुदायों के प्रतिनिधित्व पर हमेशा जोर देने की उनकी विचारधारा के अनुरूप है। जगन बिजी शेड्यूल के कारण मुर्मू द्वारा नामांकन दाखिल करने में शामिल नहीं हो पाएंगे। हालांकि, राज्यसभा सांसद विजयसाई रेड्डी और लोकसभा सांसद मिधुन रेड्डी मौजूद रहेंगे।
             ओडिशा की बीजू जनता दल पहले ही मुर्मू के समर्थन की घोषणा कर चुकी है। मेघालय जनतांत्रिक गठबंधन ने भी समर्थन करने की घोषणा की है। आरएसएस के एक संगठन अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम ने द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवार बनाए जाने के निर्णय को ऐतिहासिक करार दिया है। सिक्किम के मुख्यमंत्री और सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा के अध्यक्ष प्रेम सिंह तमांग ने राष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए द्रौपदी मुर्मू की उम्मीदवारी का समर्थन किया है। बिहार की हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा ने भी समर्थन करने की घोषणा की है। एलजेपी (रामविलास) भी मुर्मू के समर्थन की घोषणा कर चुकी है।
             धीरे-धीरे विपक्षी पार्टियां जिस तरह द्रोपदी मुर्मू का समर्थन कर रही हैं उसे देखकर यही लगता है कि हो सकता है द्रोपदी मुर्मू निर्विरोध चुन ली जाये और चुनाव की जरूरत ही ना पड़े। अगर ऐसा होता है तो यह एक आदीवासी महिला के लिए देश का सम्मान होगा।

कौन हैं द्रौपदी मुर्मू
द्रौपदी मुर्मू ओडिशा से आनेवाली आदिवासी नेता हैं। झारखंड की नौंवी राज्यपाल रह चुकीं द्रौपदी मुर्मू ओडिशा के रायरंगपुर से विधायक रह चुकी हैं। वह पहली ओडिया नेता हैं जिन्हें राज्यपाल बनाया गया। इससे पहले ठश्रच्-ठश्रक् गठबंधन सरकार में साल 2002 से 2004 तक वह मंत्री भी रह चुकी हैं।

देश को मिल सकता है पहला आदिवासी राष्ट्रपति
देश में अब तक आदिवासी समुदाय का कोई व्यक्ति राष्ट्रपति नहीं बन पाया है। महिला, दलित, मुस्लिम और दक्षिण भारत से आने वाले लोग राष्ट्रपति बन चुके हैं, लेकिन आदिवासी समुदाय इससे वंचित रहा है। ऐसे में यह मांग उठती रही है कि दलित समाज से भी किसी व्यक्ति को देश के सर्वोच्च पद पर बैठाया जाए।

देश में अब तक किस वर्ग से कितने राष्ट्रपति बने
जीतने पर द्रौपदी मुर्मू देश की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति होंगी। उनसे पहले दलित वर्ग से आने वाले केआर नारायणन और मौजूदा राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद इस पर पहुंचे हैं, लेकिन पहली बार आदिवासी समुदाय से किसी को राष्ट्रपति बनने का मौका मिल रहा है। वहीं, प्रतिभा पाटिल के बाद दूसरी बार कोई महिला इस पद पर पहुंचेगी।

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