हरिद्वार में 54 करोड़ के ज़मीन घोटाले ने मचाया हड़कंप, धामी सरकार ने 12 अफसरों को किया निलंबित

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March 5, 2026

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हरिद्वार में 54 करोड़ के ज़मीन घोटाले ने मचाया हड़कंप, धामी सरकार ने 12 अफसरों को किया निलंबित

उत्तराखंड/हरिद्वार/अनीशा चौहान/-  उत्तराखंड के हरिद्वार ज़िले में सामने आए 54 करोड़ रुपये के ज़मीन घोटाले ने राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में सनसनी फैला दी है। इस गंभीर मामले में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपनी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत बड़ा कदम उठाते हुए दो आईएएस, एक पीसीएस अधिकारी समेत कुल 12 लोगों को निलंबित कर दिया है। घोटाले की विस्तृत जांच के लिए विजिलेंस विभाग को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

कैसे हुआ घोटाले का पर्दाफाश?

मामला हरिद्वार नगर निगम द्वारा सराय गांव में स्थित 33 बीघा कृषि भूमि को 54 करोड़ रुपये में खरीदने से जुड़ा है। जांच में सामने आया कि यह भूमि कूड़े के ढेर के पास थी और उसका तत्काल कोई उपयोग भी नहीं था। जमीन की वास्तविक कीमत लगभग 15 करोड़ रुपये आंकी गई, लेकिन इसे बाज़ार मूल्य से कहीं अधिक यानी 54 करोड़ रुपये में खरीदा गया।

जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि इस ज़मीन का भू-उपयोग (लैंड यूज़) कृषि से वाणिज्यिक में बदलने की प्रक्रिया सिर्फ़ 6 दिनों में पूरी कर दी गई, जबकि आमतौर पर ऐसी प्रक्रिया में महीनों लगते हैं। लैंड यूज़ बदलने के बाद ज़मीन की कीमत 6,000 रुपये प्रति वर्ग मीटर से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति वर्ग मीटर तक पहुंच गई।

धामी सरकार का सख़्त रुख

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ आईएएस अधिकारी रणवीर सिंह चौहान को जांच सौंपी। चौहान ने इस मामले में 24 लोगों के बयान दर्ज किए और दस्तावेज़ों की गहन छानबीन की। जांच के बाद उन्होंने सरकार को 100 पेज की विस्तृत रिपोर्ट सौंपी, जिसके आधार पर 3 जून को सरकार ने बड़ी कार्रवाई की।

कार्रवाई के तहत हरिद्वार के जिलाधिकारी और तत्कालीन नगर निगम प्रशासक कर्मेंद्र सिंह, तत्कालीन नगर आयुक्त और वर्तमान अपर सचिव (स्वास्थ्य) वरुण चौधरी, तत्कालीन उप-जिलाधिकारी (एसडीएम) हरिद्वार अजयवीर सिंह, वरिष्ठ वित्त अधिकारी निकिता बिष्ट, राजेश कुमार और कमलदास को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।

सरकार की सख्ती का संदेश

धामी सरकार की इस तेज़ और कठोर कार्रवाई ने साफ संदेश दिया है कि राज्य में भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस घोटाले की गूंज न केवल प्रशासनिक हलकों में, बल्कि आम जनता के बीच भी चर्चा का विषय बन गई है। अब निगाहें विजिलेंस जांच की आगामी रिपोर्ट और भविष्य में होने वाली कानूनी कार्रवाइयों पर टिकी हैं।

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