सोनिया का पुत्रमोह या कांग्रेस को बचाने की कवायद, पीके को नही मिली कांग्रेस में एंट्री

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सोनिया का पुत्रमोह या कांग्रेस को बचाने की कवायद, पीके को नही मिली कांग्रेस में एंट्री

-प्रियंका को कांग्रेस का अध्यक्ष व पार्टी में सुधार के लिए खुली छूट चाहते थे प्रशांत किशोर, सोनिया ने नकारा
नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/- पिछले 10 दिनों से प्रशांत किशोर को पार्टी में शामिल करने को लेकर चल रही जदोजहद का आखिर आज अंत हो गया। पीके की अचानक कांग्रेस में शामिल होने की सभी कवायद बंद हो गई और उनके द्वारा मांगे गये कुछ अधिकारों के चलते उन्हे बाहर का रास्ता देखना पड़ा। हालांकि पीके प्रियंका गांधी को पार्टी अध्यक्ष बनाना चाहते थे और साथ ही वे पार्टी के अंदर सुधारों के लिए फ्री हैंड यानी हर तरह की छूट चाहते थे जिसे लेकर सोनिया गांधी संतुष्ट नही हो पाई। सोनिया गांधी अभी भी राहुल गांधी को ही कांग्रेस का अध्यक्ष बनाना चाहती है और पीके के तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव के साथ संबंध भी इसकी बड़ी वजह माने जा रहे है। जिसकारण प्रशांत किशोर की कांग्रेस में एंट्री नही हो पाई। हालांकि कुछ लोग इसे सोनिया गांधी का पुत्र मोह बता रहे है लेकिन सोनिया गांधी के सामने कांग्रेस को बचाने की एक बड़ी चुनौती भी है।  
             मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मंगलवार सुबह तक सब कुछ ठीक था। सोमवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने राजनीतिक चुनौतियों से निपटने के लिए ’एम्पावर्ड एक्शन ग्रुप 2024’ के गठन की घोषणा की थी और प्रशांत किशोर को इस ग्रुप में शामिल होने का ऑफर दिया था, लेकिन प्रशांत ने इस प्रस्ताव को ठुकराते हुए कहा कि कांग्रेस को मेरी नहीं, अच्छी लीडरशिप और बड़े पैमाने पर बदलाव की जरूरत है। मंगलवार सुबह एआईसीसी प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट के जरिए प्रशांत को प्रस्ताव दिए जाने और उनके इसे ठुकरा देने की जानकारी दी। इसके बाद से ही कयासबाजी के दौर शुरू हो गए थे।
               प्रशांत के कांग्रेस में शामिल होने से इनकार करने को लेकर दो तरह की असहमतियां सामने आई थी। कांग्रेस की तरफ से कहा गया कि उन्हें एक निश्चित जिम्मेदारी लेने के लिए कहा गया था, जबकि प्रशांत किशोर ने दावा किया कि उन पर चुनावों की जिम्मेदारी लेने के लिए दबाव बनाया गया। प्रशांत ने अपने ट्वीट में साफतौर पर कहा भी कि कांग्रेस उनकी तरफ से सुझाए गए बड़े पैमाने पर जरूरी सुधारों को स्वीकारने को तैयार नहीं है, जिनमें एआईसीसी के ढांचे में बदलाव के साथ-साथ कांग्रेस अध्यक्ष के कार्यकाल का मुद्दा शामिल है और पार्टी उन्हें केवल चुनावी रणनीति तक सीमित रखना चाहती है।
             दरअसल प्रशांत का सुझाव था कि पार्टी को निर्णय लेने की प्रक्रिया को तेज करने की जरूरत है, साथ ही साथ चुनाव प्रबंधन और संगठनात्मक प्रबंधन के लिए निश्चित विंग बनाने का भी उनका प्रस्ताव था। इसके अलावा वे पार्टी में जरूरी सुधारों को लागू करने में भी अपने लिए खुली छूट चाहते थे, लेकिन कांग्रेस के वेटरन नेता उन्हें इतनी छूट देने के लिए तैयार नहीं थे।
               कांग्रेस के एक पदाधिकारी का दावा है कि प्रशांत किशोर चाहते थे कि पार्टी प्रधानमंत्री पद के लिए अलग चेहरा और अध्यक्ष पद के लिए किसी दूसरे का चुनाव करे। पार्टी अध्यक्ष पद के लिए उन्होंने प्रियंका गांधी का नाम सुझाया था, जबकि सोनिया गांधी समेत तमाम वेटरन नेता राहुल गांधी को दोबारा पार्टी चीफ बनाना चाहते थे। विचारों के इस टकराव के कारण ही पीके और कांग्रेस के रास्ते अलग हो गए।
              प्रशांत किशोर की तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव के साथ मुलाकात और उनकी कंपनी प्च्।ब् की तरफ से राव की पार्टी टीआरएस के साथ कांट्रेक्ट साइन करने से भी कांग्रेस में असंतोष था। कांग्रेस कमेटी ने शर्त रखी कि पार्टी में शामिल होने के बाद च्ज्ञ को सभी दलों के साथ दोस्ती खत्म करनी होगी। इसे भी लेकर असहमति का माहौल था।
               अब सभी निगाहें कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के एम्पॉवर्ड ग्रुप के गठन पर लगी हैं। इसके चेयरमैन और मेंबर्स के चयन को लेकर उनकी चॉइस से ही कांग्रेस के भविष्य को लेकर स्पष्टता जाहिर हो पाएगी।

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