मानसी शर्मा /- महाराष्ट्र और झारखंड के चुनावी तारीखों का ऐलान होते ही सारे दल एक्टिव हो गए हैं। यहां तक की भाजपा ने झारखंड में एनडीए के सहयोगी दलों के साथ सीट शेयरिंग को अमलीजामा दे दिया है। वहीं, महाराष्ट्र में लगभग सीट शेयरिंग तय हो गया है। सिर्फ ऐलान करना बाकी रह गया है। अब सवाल उठ रहा है कि दोनों राज्यों के चुनाव को लेकर कांग्रेस की क्या तैयारी है?
अगर महाराष्ट्र में देखा जाए तो कांग्रेस के साथ शिवसेना( उद्धव गुट) और एनसीपी ( शरद गुट) शामिल है। हालांकि अभी तक तीनों दलों के बीच सीट शेयरिंग को लेकर बात नहीं बन पाई है। कमोबेश यही हाल झारखंड में भी है। झारखंड में कांग्रेस के साथ झारखंड मुक्ति मोर्चा ( जेएमएम), आरजेडी और सीपीआई का गठबंधन है। राज्य में हेमंत सोरेन की जेएमएम बड़े भाई की भूमिका में है। हालांकि यहां भी सीट शेयरिंग को लेकर कांग्रेस में कोई सुगबुगाहट नहीं है।
झारखंड में कहां फंसा है पेंच?
बताया जा रहा है कि हेमंत सोरेन की जेएमएम सिर्फ 27सीटें कांग्रेस को देना चाहती है। इसके पीछे जेएमएम तर्क दे रही है कि कांग्रेस पिछले चुनाव में सिर्फ 27सीटों पर जीत हासिल की थी। हालांकि पिछले चुनाव में कांग्रेस 31सीटों पर चुनाव लड़ी थी। कहा जा रहा है कि हरियाणा चुनाव के दौरान ही झारखंड चुनाव के लिए सीट शेयरिंग का फॉर्मूला तय हुआ था। जिसके तहत जेएमएम 43, कांग्रेस 29, आरजेडी 5और माले 4सीटों पर चुनाव लड़ेगी लेकिन, अब जेएमएम कांग्रेस को सिर्फ 27सीट देने को ही तैयार है। बता दें कि झारखंड विधानसभा में 81सीटें हैं।
महाराष्ट्र में कहां फंसा पेंच?
महाराष्ट्र में भी कांग्रेस के लिए राह आसान नहीं है। क्योंकि 288विधानसभा सीटों वाली महाराष्ट्र में कांग्रेस के साथ शिवसेना( उद्धव गुट) और एनसीपी ( शरद गुट) का गठबंधन है। जिसे महाविकास अघाड़ी भी बोला जाता है। बताया जा रहा है कि महराष्ट्र में 260सीटों पर बात बन गई है। अब 28सीटों पर कांग्रेस और शिवसेना के बीचा खींचातानी हो रही है। हालांकि कौन पार्टी कितनी सीटों पर लड़ेगी? इसको लेकर अभी ऐलान नहीं हुआ है।
आपको बता दें कि महाराष्ट्र में एक चरण में 20 नवंबर को मतदान होंगे। वहीं, झारखंड में दो चरणों में 13 नवंबर और 20 नवंबर को मतदान होंगे। साथ ही दोनों राज्यों के चुनावी नतीजे 23 नवंबर को आएंगे।


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