साहित्य और संस्कृति का अटूट सम्बन्ध- राज्यपाल

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August 25, 2026

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साहित्य और संस्कृति का अटूट सम्बन्ध- राज्यपाल

-राज्यपाल ने पूर्व आई.पी.एस. अधिकारी श्री पी. लाल द्वारा लिखित ‘सरस्वती नदी और दी आर्यन्स’ नामक पुस्तक का किया विमोचन

चंडीगढ़/- साहित्य और संस्कृति का अटूट सम्बन्ध है। किसी भी देश की संस्कृति को साहित्य के माध्यम से ही बढ़ावा दिया जा सकता है। इसलिए साहित्यकार संस्कृति को बढ़ावा देने में अपनी लेखनी का प्रयोग करें। यह बात हरियाणा के राज्यपाल श्री बंडारू दत्तात्रेय ने आज पूर्व आई.पी.एस. अधिकारी श्री पी. लाल द्वारा लिखित ‘सरस्वती नदी और दी आर्यन्स’ नामक पुस्तक का विमोचन करने उपरान्त अपने विचार सांझा किए। उन्होंने लेखक को शुभकामनाएं दी।
              इस अवसर पर लेखक की धर्म पत्नी श्री मती गीता लाल व सुपुत्री पुर्णिमा लाल भी उपस्थित थी। उन्होंने कहा कि साहित्य लेखन से ही देश विदेश में संस्कृति प्रफुल्लित किया होती है। वैदिक संस्कृति ईसा पूर्व से हजारों वर्ष से भी पुरानी है। वैदिक संस्कृति के हरियाणा में अवशेष मौजूद हैं। इसका जीता जागता उदाहरण सरस्वती नदी का आदी बद्री में उद्गम स्थान होना है। वैदिक संस्कृति के विकास के लिए हरियाणा सरकार द्वारा भी सराहनीय प्रयास किए जा रहे है।
            लेखक श्री पी. लाल ने अपनी पुस्तक में प्राचीन भारतीय इतिहास के मुद्दों को शामिल किया है जिसमें वैदिक संस्कृति की पुरातनता और सुदूर अतीत में सरस्वती नदी का अस्तित्व शामिल है। ऋग्वेद में प्रमाणित है कि सरस्वती नदी एक शक्तिशाली, भौतिक, बहने वाली नदी थी। लेखक ने पुस्तक में निष्कर्ष दिया है कि वैदिक संस्कृति 6,000-7,000 ईसा पूर्व पुरानी है। इसके अलावा पुस्तक में घग्गर-हाकरा चौनलों का भी सरस्वती नदी से संबंध का जिक्र किया है। लेखक ने आदि बद्री पर एक बांध बनाकर चौनलों को रिचार्ज करने पर हरियाणा और हिमाचल प्रदेश की सरकारों के प्रयासों की भी प्रशंसा की है। श्री लाल ने अपने निष्कर्षों के समर्थन में भाषाई, पुरातत्व, शाब्दिक, खगोलीय और आनुवंशिकी साक्ष्य के साथ संयुक्त वैज्ञानिक अध्ययनों को उद्धृत किया है। उनका तर्क है कि भारतीय उपमहाद्वीप में बाहर से कोई आर्य प्रवास नहीं हुआ है, वैदिक संस्कृति जो ग्रामीण थी और हड़प्पा संस्कृति जो शहरी थी, एक दूसरे के पूरक थे।

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