संतूर बनाम लाइफबॉय: बाज़ार में बढ़ी ब्रांडों की टक्कर

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October 17, 2026

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संतूर बनाम लाइफबॉय: बाज़ार में बढ़ी ब्रांडों की टक्कर

लाइफस्टाइल/सिमरन मोरया/- अजीम प्रेमजी की कंपनी विप्रो कंज्यूमर केयर एंड लाइटिंग को पूरा भरोसा है कि उनकी कंपनी का साबुन ब्रांड ‘संतूर’, हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (HUL) के ‘लाइफबॉय’ को पीछे छोड़ देगा। कंपनी के एक बड़े अधिकारी ने यह बात कही है। उनका कहना है कि संतूर अब साबुन और पर्सनल केयर के बाजार में नंबर 1 बन जाएगा। संतूर ब्रांड अब 2,700 करोड़ रुपये से ज्यादा का हो गया है। यह अब लिक्विड हैंड वॉश और बॉडी लोशन जैसे दूसरे प्रोडक्ट में भी आ गया है।

विप्रो कंज्यूमर केयर एंड लाइटिंग के सीईओ विनीत अग्रवाल ने कहा, ‘हमें नहीं पता कि हम अभी नंबर 1 हैं या नहीं। लाइफबॉय कितना बड़ा है, यह भी नहीं पता। लेकिन हम जल्द ही नंबर 1 बन जाएंगे।’ उन्होंने यह बात संतूर ब्रांड और उसके भविष्य के बारे में पूछे जाने पर कही। उन्होंने आगे कहा, ‘हमने कुछ साल पहले ही लक्स (HUL Santoor and Lifebuoy soap क्या संतूर बनेगा नंबर वन साबुन का एक और साबुन ब्रांड) को पीछे छोड़ दिया था। मुझे पूरा विश्वास है कि हम एक साल में लाइफबॉय को भी पीछे छोड़ देंगे।’

कितना बड़ा है लाइफबॉय ब्रांड?
पीटीआई के मुताबिक लाइफबॉय भी 2,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का ब्रांड है। यह हाइजीन (सफाई) के सामान बनाता है। संतूर की तरह, लाइफबॉय भी अब हैंडवॉश जैसे दूसरे उत्पादों में आ गया है।

विप्रो ने FY25 (वित्तीय वर्ष 2024-25) में 7.5 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि दर्ज की है। यह वृद्धि बाजार में चुनौतियों और महंगाई के बावजूद हुई है। कंपनी पर्सनल केयर से लेकर खाने-पीने के सामान तक कई चीजें बनाती है। इसके लिए उसने कई कंपनियों को खरीदा है।

अग्रवाल ने कहा, ‘मुझे लगता है कि हमने जिन कंपनियों को खरीदा है, उनमें से ज्यादातर ने अच्छा प्रदर्शन किया है। उदाहरण के लिए, हमने साल 2004 में चंद्रिका को खरीदा था। यह केरल में एक छोटा ब्रांड था। अब यह बहुत बढ़ गया है। हमने साल 2009 में यार्डली को भारत में खरीदा था। तब यह भारत में सिर्फ 18 करोड़ रुपये का था। अब यह 300 करोड़ रुपये से ज्यादा का हो गया है।’

विदेशों में भी खरीदे ब्रांड
विप्रो ने विदेश में भी कई ब्रांड खरीदे हैं। कंपनी ने साल 2007 में Unza को खरीदा था। यह दक्षिण पूर्व एशिया में पांच गुना बढ़ गया है। कैनवे को साल 2020 में दक्षिण अफ्रीका में खरीदा गया था। यह ब्रांड पांच सालों में 20 मिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 50 मिलियन डॉलर का हो गया है।

छोटे शहरों और गांव में फोकस
विप्रो कंज्यूमर केयर एंड लाइटिंग, अजीम प्रेमजी की कंपनी विप्रो एंटरप्राइजेज का हिस्सा है। इसका कारोबार 10,600 करोड़ रुपये का है। विप्रो का फोकस अब छोटे शहरों और गांवों में अपनी पकड़ मजबूत करने पर है। कंपनी का मानना है कि इन जगहों पर संतूर की डिमांड तेजी से बढ़ रही है।

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