देहरादून/अनीशा चौहान/- चमोली ज़िले के एक विद्यालय में आयोजित समारोह के दौरान एक शिक्षक द्वारा शिक्षा मंत्री डॉ. धनसिंह रावत के समक्ष तीखे लहजे में अपनी बात रखने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो गया था। इस प्रकरण में संबंधित अधिकारियों ने शिक्षक को सरकारी सेवा आचरण नियमावली का हवाला देते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया था।
हालांकि, अब इस मामले में शिक्षा मंत्री स्वयं आगे आए हैं और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि उस शिक्षक के विरुद्ध कोई भी दंडात्मक कार्यवाही न की जाए। मंत्री रावत ने इस बात पर बल दिया कि लोकतांत्रिक प्रणाली में प्रत्येक व्यक्ति को अपनी बात कहने का अधिकार है, जब तक कि वह मर्यादा का उल्लंघन न करे।
शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) डॉ. मुकुल सती ने जानकारी देते हुए बताया कि जिस मुद्दे को लेकर शिक्षक ने अपनी बात रखी थी, वह पहले से ही न्यायालय की प्रक्रिया में है। उन्होंने कहा कि शिक्षक को इस विषय की पूरी जानकारी थी, इसके बावजूद उन्होंने मंच से उस विषय को अनावश्यक रूप से उठाया।
अब मंत्री के हस्तक्षेप के बाद शिक्षक को राहत मिली है और मामले को यथास्थिति में छोड़ने के आदेश दिए गए हैं। इस निर्णय का कई शिक्षकों और कर्मचारियों ने स्वागत किया है और इसे सकारात्मक पहल के रूप में देखा जा रहा है।


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