झारखंड/सिमरन मोरया/- झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के चाकुलिया प्रखंड की रहने वाली पद्मश्री जमुना टुडू एक बार फिर सुर्खियों में है। लेडी टार्जन के नाम से मशहूर जमुना टुडू पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में अपने योगदान के लिए जानी जाती हैं। साल 2019 में उन्हें भारत के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मश्री से नवाजा गया। वहीं, अब हाल ही में स्वतंत्रता दिवस 2025 के मौके पर उन्हें राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक विशेष डिनर में आमंत्रित किया गया।
राष्ट्रपति भवन में डिनर का आमंत्रण
दरअसल, हाल ही में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने स्वतंत्रता दिवस 2025 के मौके पर जमुना टुडू को राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक विशेष डिनर के लिए आमंत्रित किया। मालूम हो कि राष्ट्रपति मुर्मू खुद आदिवासी समुदाय से आती हैं। उन्होंने जमुना के प्रयासों की सराहना की और उनके कार्य को सामाजिक सशक्तीकरण का प्रतीक बताया। यह आयोजन न केवल जमुना के लिए, बल्कि उन सभी महिलाओं के लिए सम्मान का विषय था, जो उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर जंगलों की रक्षा में जुटी हैं।
वहीं, जब राष्ट्रपति भवन से निमंत्रण मिला तो जमुना भावुक हो उठीं। उन्होंने इस निमंत्रण को एक बड़ी खुशी और सम्मान बताया है। उन्होंने कहा ‘यह आमंत्रण न सिर्फ मेरे लिए, बल्कि उस हर महिला और हर ग्रामीण के लिए है जो पर्यावरण को बचाने के लिए लड़ रहा है। मैं भारतीय डाक विभाग का दिल से धन्यवाद देती हूं, जिन्होंने इस सम्मान को मेरे घर तक पहुंचाया।’
कौन हैं जमुना टुडू?
बता दें, जमुना टुडू का जन्म झारखंड के एक छोटे से गाँव मुटूरखाम में हुआ था। लेकिन उनकी कहानी किसी सुपरहीरो से कम नहीं है। उन्होंने सीमित संसाधनों और सामाजिक बाधाओं के बावजूद जंगल और पर्यावरण को बचाने के लिए हरसंभव कोशिश की और संकल्प लिया कि वह अपने इस मिशन से कभी पीछे नहीं हटेगी। लेकिन जब उनकी शादी हुई तो अपने ससुराल जा के उन्हें पता चला कि वहां के जंगल अवैध कटाई और लकड़ी माफिया के कारण तेजी से नष्ट हो रहे थे।
उन्होंने अपने गाँव की महिलाओं को एकजुट किया और उन्हें समझाया कि जंगल केवल पेड़-पौधों का समूह नहीं, बल्कि आदिवासी समुदायों की आजीविका, संस्कृति और पहचान का आधार हैं। इसके बाद उन्होंने वन संरक्षण समिति की स्थापना की।
‘लेडी टार्जन’ की उपाधि और पद्मश्री सम्मान
बता दें, जमुना को ‘लेडी टार्जन’ का नाम उनके साहस और जंगल के प्रति समर्पण के कारण मिला। वह और उनकी महिला समूह की सदस्य न केवल जंगलों की निगरानी करती हैं, बल्कि लकड़ी माफिया और अवैध कटाई करने वालों का डटकर मुकाबला भी करती हैं। मुटूरखाम गाँव में शुरू हुआ उनका अभियान आज 50 हेक्टेयर से अधिक जंगल की रक्षा कर चुका है। उनके प्रयासों से न केवल पर्यावरण संरक्षित हुआ, बल्कि स्थानीय समुदायों की आजीविका भी सुरक्षित हुई।
इसके अलावा, साल 2019 में जमुना टुडू को उनके पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तीकरण के कार्यों के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर उन्होंने कहा था ‘मैंने कभी नहीं सोचा था कि मुझे इतना बड़ा सम्मान मिलेगा। यह मेरे लिए और मेरी समिति की सभी महिलाओं के लिए गर्व का क्षण है। हम जब तक सांस लेंगे, जंगल बचाने के लिए लड़ते रहेंगे।’


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