‘राष्ट्र प्रथम-राष्ट्र सर्वोपरि’ कार्यक्रम में स्वामी रामभद्राचार्य जी का ओजस्वी व्याख्यान

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‘राष्ट्र प्रथम-राष्ट्र सर्वोपरि’ कार्यक्रम में स्वामी रामभद्राचार्य जी का ओजस्वी व्याख्यान

-श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय की तिरंगा यात्रा में पंहुचे स्वामी रामभद्राचार्य

नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/- पिछले दिनों भारत एवं पाकिस्तान के सम्बन्धों में हुए तनाव को ध्यान में रखते हुए देशवासियों में राष्ट्रप्रेम की भावना की संचार करने के उद्देश्य से शिक्षा मन्त्रालय, भारत सरकार के निर्देशानुसार संस्थाओं, विश्वविद्यालयों द्वारा ‘राष्ट्र प्रथम-राष्ट्र सर्वोपरि’ विषयक विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के कुलपति के आह्वान पर विश्वविद्यालय के आचार्यों, अधिकारियों, कर्मचारियों एवं छात्रों ने ‘भारत माता की जय’, ‘वन्दे मातरम’, ‘जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान’ जैसे राष्ट्रीय उद्घोष करते हुए भव्य तिरंगा यात्रा निकाली। यह तिरंगा यात्रा विश्वविद्यालय के पूरे परिसर में लगभग २ घंटे तक चलती रही।

इस अवसर पर परम आदरणीय स्वामी रामभद्राचार्य जी महाराज के ओजस्वी वक्तव्य से पूरा परिसर भगवामय हो गया। राष्ट्र के विषय में महाराज की वाणी अत्यन्त प्रचण्ड रूप धारण कर लेती है। महाराज जी ने आपरेशन सिन्दूर का जिक्र करते हुए भारत की सेना को हृदय से आशीर्वाद दिया। उन्होंने कहा कि इतने कम समय में ही भारत की सेना ने पड़ोसी देश के पसीने निकाल दिये। उन्होंने कई सारे आतंकी स्थानों को तबाह कर दिया। जब पाकिस्तान की सेना नापाक कोशिश करते हुए सिविल्स पर ड्रोन्स छोड़ना शुरु किया, तो भारतीय सेना ने पाकिस्तान को समूलतः नष्ट करने का ठान लिया किन्तु काल ने रहम करते हुए उनको थोड़ा और समय दे दिया। देश के प्रधानमन्त्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि पाकिस्तान की तरफ से एक भी आतंकी बारदात की जाती है, तो वह युद्ध का ऐलान होगा। महाराज जी के ऐसे ओजस्वी वचनों से सम्पूर्ण सभा में राष्ट्रप्रेम की धारा प्रवाहित हो रही थी। प्रत्येक छात्र की आँखों में पाकिस्तान के प्रति रोष दिख रहा था। इस अवसर पर व्याकरण शास्त्र के मूर्धन्य विद्वान् प्रो. जयकान्त सिंह शर्मा जी का भी अत्यन्त सारगर्भित व्याख्यान हुई। माननीय कुलपति जी ने महाराज जी को नतमस्तक होकर राष्ट्र के सर्वकुशल होने की बात कही। उन्होंने सभी छात्रों को देश के प्रति जागरूक होने एवं देश के प्रति अपने कर्तव्यो को इमानदारी पूर्वक करने की बात कही। इस संगोष्ठी का संचालन प्रो. रामसलाही द्विवेदी जी नी तथा संयोजन प्रो. देवेन्द्र प्रसाद मिश्र ने किया। इस अवसर पर सभागार में 500 से अधिक की संख्या में श्रोता उपस्थित रहे।

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