कन्या पूजन की परंपरा: माँ के नौ रूपों की आराधना का अद्भुत पर्व “घर के आँगन में”

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October 22, 2026

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कन्या पूजन की परंपरा: माँ के नौ रूपों की आराधना का अद्भुत पर्व “घर के आँगन में”

-पूड़ी, हलवा और चने का प्रसाद प्रेम और भक्ति के साथ परोसा जाता है। -भोजन उपरांत कन्याओं को दक्षिणा और उपहार देकर विदा किया जाता है।

नई दिल्ली/उमा सक्सेना/-     राम नवमी का पावन पर्व पूरे देश में आस्था और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। इस अवसर पर हर घर में माँ की भक्ति और परंपराओं का सुंदर संगम दिखाई देता है। विशेष रूप से कन्या पूजन की विधि, जो हमारी संस्कृति का अहम हिस्सा है, बड़े ही स्नेह और श्रद्धा के साथ संपन्न की जाती है।

घर के आँगन में कन्याओं का स्वागत
राम नवमी के दिन सुबह-सुबह घर के आँगन को सजाकर छोटी-छोटी कन्याओं को आमंत्रित किया जाता है। परंपरा के अनुसार सबसे पहले उनके चरण पखारे जाते हैं और उन्हें स्वच्छ आसन पर सम्मानपूर्वक बैठाया जाता है। माथे पर तिलक और हाथों में कलावा बाँधकर यह संदेश दिया जाता है कि कन्याएँ वास्तव में माँ दुर्गा के नौ रूपों की प्रतीक मानी जाती हैं।

भक्ति और प्रेम से परोसा जाता है प्रसाद
पूजन के बाद कन्याओं को प्रेम और श्रद्धा से भोजन परोसा जाता है। पूड़ी, हलवा, चना और अन्य प्रसाद से सजी थालियाँ जब इन नन्ही कन्याओं के सामने रखी जाती हैं तो वातावरण भक्ति और आनंद से भर उठता है। ऐसा प्रतीत होता है मानो स्वयं देवियाँ भक्तों के घर पधारकर प्रसाद स्वीकार कर रही हों।

श्रद्धा से दी जाती है दक्षिणा और उपहार
भोजन उपरांत कन्याओं को आदरपूर्वक दक्षिणा और उपहार प्रदान किए जाते हैं। यह परंपरा केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। इससे बच्चों में सम्मान, स्नेह और आदर की भावना को बढ़ावा मिलता है।

संस्कृति की आत्मा है यह परंपरा
जब नन्ही कन्याएँ अपनी थालियाँ लेकर विदा होती हैं तो हर घर में अपार संतोष और पवित्रता का भाव भर जाता है। वास्तव में कन्या पूजन हमारी भारतीय संस्कृति की आत्मा है, जो माँ के चरणों की भक्ति और जीवन में स्त्री शक्ति के महत्व को दर्शाता है। राम नवमी पर इस परंपरा के माध्यम से हर घर में भक्ति, आनंद और स्नेह का अद्भुत संगम दिखाई देता है।

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