यूपी के जालौन में दिल दहला देने वाली घटना: आईफोन की जिद बनी 11वीं की छात्रा की मौत की वजह

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October 8, 2026

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उत्तर प्रदेश/उमा सक्सेना/-    उत्तर प्रदेश के जालौन जिले से एक बेहद दुखद और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक 11वीं कक्षा की छात्रा ने कथित तौर पर आईफोन न दिलाए जाने से नाराज होकर जहर खाकर आत्महत्या कर ली। इस हादसे के बाद पूरे परिवार में मातम पसरा हुआ है और गांव में भी शोक का माहौल है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, वहीं पिता खुद को जिंदगी भर का गुनहगार मान रहे हैं।

आईफोन की जिद और आर्थिक मजबूरी
यह घटना डकोर कोतवाली क्षेत्र के कुसमिलिया गांव की है। यहां रहने वाले तुलसीराम राजपूत खेती और ऑटो चलाकर अपने परिवार का गुजारा करते हैं। परिवार में दो बेटियां और एक बेटा है। बड़ी बेटी की शादी हो चुकी है, जबकि छोटी बेटी माया (17 वर्ष) गांव के राजकीय इंटर कॉलेज में कक्षा 11वीं की छात्रा थी। माया का कुछ समय पहले मोबाइल फोन खराब हो गया था, जिसके बाद वह नया फोन लेने की जिद करने लगी। उसने एक पुराना आईफोन मांगा, जिसकी कीमत करीब 40 हजार रुपये बताई जा रही थी।

परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण पिता उसकी यह मांग तुरंत पूरी नहीं कर सके। तुलसीराम ने बेटी को समझाया कि फिलहाल उनके पास इतने पैसे नहीं हैं, लेकिन मटर की फसल बिकने के बाद 10-15 दिन में वह किसी तरह फोन दिलाने की कोशिश करेंगे। बावजूद इसके माया अपनी जिद पर अड़ी रही।

पहले भी करती रही थी जिद
परिजनों के अनुसार, माया का स्वभाव कुछ हद तक जिद्दी था। इससे पहले उसने घड़ी की मांग की थी, जिसे पूरा कर दिया गया था। बाद में उसने सोने की झुमकी मांगी, लेकिन फिर उसने झुमकी छोड़कर आईफोन लेने की जिद पकड़ ली। पिता ने कई बार समझाने की कोशिश की, लेकिन वह मानने को तैयार नहीं हुई।

घर में अकेलेपन में उठाया खौफनाक कदम
घटना वाले दिन पिता ऑटो चलाने गए हुए थे और मां बबली खेत में मटर तोड़ने गई थीं। माया घर में अकेली थी। इसी दौरान उसने चूहा मारने की दवा खा ली। जब छोटा भाई मानवेंद्र घर लौटा तो माया ने उसे बताया कि उसने जहर खा लिया है। घबराए परिजन तुरंत उसे उरई मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे, जहां हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने उसे झांसी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। हालांकि, झांसी पहुंचने से पहले ही माया की रास्ते में मौत हो गई।

पिता का दर्द और पछतावा
बेटी की मौत के बाद पिता तुलसीराम खुद को संभाल नहीं पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें जरा भी अंदाजा होता कि उनकी बेटी इतना बड़ा कदम उठा लेगी, तो वे किसी भी हालत में उसे फोन दिला देते। उन्होंने बताया कि घर में करीब 30 हजार रुपये रखे थे, जिसकी जानकारी माया को थी। उन्होंने बेटी से कहा था कि वह सब्जी बेचने का काम शुरू करेंगे और मुनाफा होने पर उसे फोन दिलवा देंगे। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।

पुलिस जांच में जुटी
डकोर कोतवाली प्रभारी निरीक्षक विजय पांडेय ने बताया कि पूरे मामले की जांच की जा रही है। परिजनों से पूछताछ की जा रही है कि छात्रा ने किन परिस्थितियों में जहर खाया। पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच कर रही है।

यह घटना न सिर्फ एक परिवार की त्रासदी है, बल्कि समाज के लिए भी एक गंभीर चेतावनी है कि बच्चों की मानसिक स्थिति, उनकी अपेक्षाएं और दबाव को समय रहते समझना कितना जरूरी है।

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