नई दिल्ली/उमा सक्सेना/- दिल्ली के प्रशासनिक गलियारों में उस वक्त हलचल तेज हो गई जब भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायतों पर सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों पर सख़्त कदम उठाया। कापसहेड़ा क्षेत्र में तैनात सब-रजिस्ट्रार और महरौली के तहसीलदार को उनके पद से तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। अधिकारियों के खिलाफ आरोप थे कि सरकारी कार्यों के निष्पादन में नियमों को दरकिनार किया गया और जनता से जुड़े मामलों में गंभीर अनियमितताएँ हुईं। सरकार के पास लगातार मिल रही शिकायतों और जांच रिपोर्ट के आधार पर यह कार्रवाई की गई है।

इसी कार्रवाई की कड़ी में कापसहेड़ा में सक्रिय एक डीड राइटर का लाइसेंस भी रद्द कर दिया गया, जिससे पूरे राजस्व विभाग में सख़्त संदेश गया है। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि इस कदम का मकसद सिर्फ कार्रवाई करना नहीं, बल्कि सरकारी व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करना है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के निर्देशों के अनुसार भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा। सरकार ने साफ संकेत दिया है कि जो अधिकारी जनता की सेवा के बजाय निजी हितों को प्राथमिकता देंगे, उनके खिलाफ आगे भी इसी तरह कठोर कदम उठाए जाते रहेंगे।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जनता ने सरकार को सत्ता इसलिए सौंपी है ताकि आम नागरिकों से जुड़े कार्यों को गंभीरता और प्रभावी तरीके से अंजाम दिया जा सके। उन्होंने कहा कि सरकार का मुख्य उद्देश्य लोगों की रोजमर्रा की समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना है और इसके लिए प्रशासन को पूरी जवाबदेही के साथ काम करना होगा।


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