यूक्रेन में दिखी तिरंगे की ताकत, विदेशी भी सुरक्षा के लिए ले रहे तिरंगे का सहारा

स्वामी,मुद्रक एवं प्रमुख संपादक

शिव कुमार यादव

वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी

संपादक

भावना शर्मा

पत्रकार एवं समाजसेवी

प्रबन्धक

Birendra Kumar

बिरेन्द्र कुमार

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आईटी प्रबंधक

Categories

June 2026
M T W T F S S
1234567
891011121314
15161718192021
22232425262728
2930  
June 27, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

यूक्रेन में दिखी तिरंगे की ताकत, विदेशी भी सुरक्षा के लिए ले रहे तिरंगे का सहारा

-पाकिस्तान व तुर्की के छात्रों के लिए यूक्रेन से निकलने में तिरंगा बना सुरक्षा की गारंटी
नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/– यूक्रेन में रूसी हमले के चलते हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। लोग अपनी जान बचाने के लिए घरबार छोड़कर भाग रहे है। वहीं भारत सरकार ने भी अपने छात्रों व नागरिकों को यूक्रेन से निकालने के लिए कोई कोर कसर नही छोड़ी है। भारत हर माध्यम से अपने नागरिकों को निकालने का प्रयास कर रहा है जिसके लिए पड़ौसी देशों का भी साथ मिल रहा है। ऐसे में यूक्रेन फंसे दूसरे देशों के नागरिक व छात्र भी अब तिरंगें का सहारा लेकर अपनी जान बचा रहे है।
              ऐसे में इन विदेशियों का पनाहगार भारत का तिरंगा बना है। भारतीय तिरंगा न सिर्फ सुरक्षा की गारंटी बना है, बल्कि उन्हें महफूज तरीके से यूक्रेन पार कराने में भी मदद कर रहा है। यूक्रेन से लौटे भारतीय छात्रों ने ऐसी ही खबर सुनाई है, उनका कहना है कि जान बचाने के लिए पाकिस्तानी और तुर्की के छात्र अपने देश के बजाए भारत के तिरंगे की शरण ले रहे हैं।
                यूक्रेन से रोमानिया के बुखारेस्ट शहर पहुंचे भारतीय छात्रों ने कहा कि राष्ट्रीय तिरंगे ने उन्हें और साथ ही कुछ पाकिस्तानी और तुर्की छात्रों को भी सुरक्षित निकालने में मदद की। ओडेसा से आए एक छात्र ने बताया कि, हमसे कहा गया था कि तिरंगा साथ ले चलने से हमें कोई समस्या नहीं होगी। इसलिए हम सीधे बाजार गए और वहां से छह स्प्रे पेंट खरीदे। दूसरी दुकान से परदा लिया। इसके बाद परदा काटकर स्प्रे की मदद से दो तिरंगे बनाए।
                भारतीय छात्रों का कहना है कि, पाकिस्तान और तुर्की के छात्र भी ऐसा कर रहे हैं। वे अपने देश के बजाए भारत का तिरंगा इस्तेमाल कर रहे हैं। खुद को भारतीय बताकर ही वे यूक्रेन से निकल पा रहे हैं। एक छात्र ने बताया कि, हमने ओडेसा से बस बुक की और माल्डोवा सीमा पर आ गए। इस दौरान एक बार हमारा सैनिकों से सामना हुआ। हमले पहले से ही बस के बाहर दो तिरंगे लगा रखे थे, जैसे ही सैनिकों ने तिरंगे देखे उन्होंने गोलीबारी रोक दी और हमें जाने दिया।
  छात्रों ने बताया कि माल्डोवा पहुंचने के बाद हमें किसी भी प्रकार की समस्या का सामना नहीं करना पड़ा। यहां पर भारतीय दूतावास ने पूरी व्यवस्था की थी। हमारे लिए खाने से लेकर सभी जरूरत का सामान पहले से ही उपलब्ध था।

About Post Author

आपने शायद इसे नहीं पढ़ा

Subscribe to get news in your inbox