चुनाव के बाद मंहगा हो सकता है तेल, 9 से 18 रूपये प्रति लीटर बढ़ने की संभावना   

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चुनाव के बाद मंहगा हो सकता है तेल, 9 से 18 रूपये प्रति लीटर बढ़ने की संभावना   

-अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम 110 डॉलर प्रति बैरल पंहुचे
नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/- यूपी चुनाव को देखते हुए देश में पिछले 4 महीने से तेल कीमतों में कोई खास बदलाव नही हुआ है। लेकिन अब यह बात जोर पकड़ रही है कि यूपी चुनाव के तुरंत बाद देश में तेल की कीमतों में वृद्धि हो सकती है। इसका सबसे बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है जिसकारण पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी 9 से 18 रूपये तक होने की संभावना जताई जा रही है। एक अनुमान है कि फिलहाल तेल कंपनियों को घाटा खत्म करने के लिये ईंधन की कीमतों में 9 रुपये प्रति लीटर की बढ़त करने की जरुरत है. यानि कीमतें इसी स्तर पर रहती हैं तो कंपनियां धीरे धीरे पेट्रोल की कीमत 9 रुपये प्रति लीटर बढ़ा सकती है और अगर कीमत बढ़ी तो कंपनियां भी इसे बढ़ा देंगी।
                  ब्रोकरेज कंपनी जे.पी. मॉर्गन ने एक रिपोर्ट में कहा, ‘‘अगले हफ्ते तक राज्यों के विधानसभा चुनाव समाप्त हो जाएंगे. अनुमान है कि इसके बाद ईंधन की दरें दैनिक आधार पर बढ़ सकती हैं।’’ उत्तर प्रदेश मे सातवें और अंतिम चरण का मतदान सात मार्च को होगा तथा उत्तर प्रदेश समेत सभी पांच राज्यों के लिए मतगणना 10 मार्च को होनी है. कच्चे तेल के दाम चढ़ने से सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम को पेट्रोल और डीजल पर 5.7 रुपये प्रति लीटर का घाटा उठाना पड़ रहा है। जे.पी. मॉर्गन के मुताबिक तेल विपणन कंपनियों को सामान्य मार्केटिंग प्रॉफिट पाने के लिए खुदरा कीमतों में 9 रुपये प्रति लीटर या 10 प्रतिशत की वृद्धि करने की आवश्यकता है। घरेलू स्तर पर ईंधन की कीमतों में लगातार 118 दिन से कोई बदलाव नहीं किया गया है।
              रूस से तेल की आपूर्ति में व्यवधान की आशंका से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल का दाम 2014 के बाद पहली बार 110 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गए। आईईए के सदस्य देशों ने अपने स्ट्रेटजिक रिजर्व से 6 करोड़ बैरल तेल को जारी करने का फैसला लिया है. जो कि बाजार के अनुमानों से कम था इसी वजह से कीमतों में उछाल देखने को मिला है। रॉयटर्स ने बाजार के जानकारों के हवाले से लिखा है कि फिलहाल कुछ समय तक ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर ही बना रह सकता है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले पेट्रोलियम योजना और विश्लेषण प्रकोष्ठ (पीपीएसी) के मुताबिक, भारत जो कच्चा तेल खरीदता है। उसके दाम एक मार्च को 102 डॉलर प्रति बैरल से अधिक हो गए. ईंधन का यह मूल्य अगस्त 2014 के बाद सबसे ज्यादा हैं। पिछले साल नवंबर की शुरुआत में जब पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि पर लगाम लगी थी, तब कच्चे तेल की औसत कीमत 81.5 डॉलर प्रति बैरल थी।

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