नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/- दिल्ली में यमुना नदी को निर्मल बनाने के लिए केंद्र व दिल्ली सरकार मिलकर कई योजनाओं पर काम कर रही हैं। चुनाव के समय भी भाजपा ने यमुना की सफाई को प्राथमिकता में रखा था। जिसकारण आज दिल्ली की रेखा सरकार यमुना की सफाई के लिए करोड़ों रुपये की योजना बना रही है। कुछ काम शुरू भी हुआ है लेकिन दिल्ली के भीतर ही यमुना को जहरीला बनाने वाले नालों पर अभी तक किसी ने ध्यान नही दिया है। दिल्ली प्रदूषण कंट्रोल कमेटी की हालिया रिपोर्ट दर्शाती है कि दिल्ली में जहरीले नाले यमुना के पानी को खतरनाक बना रहे हैं। इसमें एक साहिबाबाद नाला भी है जो यमुना के अस्तित्व के लिए खतरा बना हुआ है।

सबसे खतरनाक साहिबाबाद ड्रेन
यमुना नदी को सबसे ज्यादा प्रदूषित करने वाला नाला गाजियाबाद जिले का साहिबाबाद ड्रेन है। यह नाला गाजियाबाद के लोनी क्षेत्र से निकलता है। इसके बाद टीला मोड़, पसौंडा, शालीमार गार्डन, शहीद नगर, रामप्रस्थ ग्रीन, साहिबाबाद औद्योगिक क्षेत्र साइट-4, वैशाली व गाजीपुर होते हुए शाहदरा ड्रेन से यमुना में जाकर गिरता है। दिल्ली व गाजियाबाद के कई घनी आबादी वाले इलाकों और करीब 1700 फैक्ट्रियों का अपशिष्ट इसी नाले के जरिए यमुना में पहुंच रहा है।

छोड़ा जा रहा फैक्ट्रियों का गंदा पानी
1700 फैक्ट्रियों का गंदा पानी डायरेक्ट नदी में छोड़ा जा रहा। इस दूषित जल से न केवल यमुना प्रभावित, भूजल भी खतरे में है बल्कि इस प्रदूषित नाले में घरेलू सीवेज के साथ-साथ साहिबाबाद साइट-4 की सैकड़ों फैक्ट्रियों का औद्योगिक अपशिष्ट भी पहुंचता है। इससे यह न केवल यमुना को प्रदूषित कर रहा है बल्कि इसके किनारे बसे इलाकों का भूजल भी तेजी से दूषित हो रहा है। पर्यावरणविदों के अनुसार इस पानी का उपयोग किसी भी रूप में मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यंत खतरनाक है।

एनजीटी के आदेशों की उड़ रही धज्जियां
इस गंभीर समस्या को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता सुशील राघव ने सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (छळज्) में याचिका दायर की थी। एनजीटी ने इस पर सख्त निर्देश दिए थे कि नाले के किनारे से अतिक्रमण हटाया जाए। नाले की सफाई हो और नाले को प्रदूषण मुक्त किया जाए। लेकिन जमीनी स्तर पर इन आदेशों का कोई असर नहीं हुआ। अब तक न तो फैक्ट्रियों का अपशिष्ट रोकने के लिए ठोस उपाय किए गए और न ही नाले के उपचार की कोई प्रभावी व्यवस्था लागू की गई।
डीपीसीसी की रिपोर्ट से खुली पोल
दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) की हालिया रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि हुई है कि यमुना में गिरने वाले 27 प्रमुख नालों में से साहिबाबाद ड्रेन सबसे प्रदूषित है। रिपोर्ट के मुताबिक बीओडी (ठपवसवहपबंस व्Ûलहमद क्मउंदक) व सीओडी (ब्ीमउपबंस व्Ûलहमद क्मउंदक) के स्तर कई गुना ज्यादा पाए गए हैं, जो न केवल जलीय जीवों के लिए खतरनाक हैं बल्कि मानव स्वास्थ्य के लिए भी चिंताजनक हैं।
समाधान की दिशा में ठोस पहल की जरूरत
पर्यावरणविद और रिटायर्ड प्रोफेसर सुरेंद्र सिंघल व सामाजिक कार्यकर्ता सुशील राघव ने मांग की है कि सरकार को इस दिशा में तुरंत प्रभावी कदम उठाने चाहिए। साहिबाबाद ड्रेन में गिरने वाले औद्योगिक अपशिष्ट के लिए प्री-ट्रीटमेंट की व्यवस्था की जाए। फैक्ट्रियों की नियमित निगरानी व घरेलू सीवेज के लिए अलग पाइपलाइन सिस्टम जरूरी है। अन्यथा यह नाला आने वाले समय में न केवल यमुना बल्कि मानव जीवन के लिए भी गंभीर संकट बन जाएगा।


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