“माँ का चतुर्थ स्वरूप : कूष्मांडा”

स्वामी,मुद्रक एवं प्रमुख संपादक

शिव कुमार यादव

वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी

संपादक

भावना शर्मा

पत्रकार एवं समाजसेवी

प्रबन्धक

Birendra Kumar

बिरेन्द्र कुमार

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आईटी प्रबंधक

Categories

August 2026
M T W T F S S
 12
3456789
10111213141516
17181920212223
24252627282930
31  
August 26, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

“माँ का चतुर्थ स्वरूप : कूष्मांडा”

नवरात्रि के नौ शक्तियों के चौथे दिवस माँ कूष्मांडा की आराधना का विधान है। “कू” का अर्थ है छोटा, “ष” का अर्थ है ऊर्जा एवं “अंडा” का अर्थ है ब्रह्माण्डीय गोला। पौराणिक मान्यता के अनुसार इन्होंने अपनी मंद मुस्कान मात्र से अंड को उत्पन्न किया, जिससे इन्हें कूष्मांडा नाम दिया गया। प्रारम्भ में सृष्टि का अस्तित्व ही नहीं था, चहुँ ओर अंधकार व्याप्त था। तब माँ कूष्मांडा ने ही अंधकार में मंद मुस्कान से “अंडे” की उत्पत्ति की, जो ब्रह्म तत्व से मिलकर ब्रह्माण्ड बना। जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं था, तब माँ ने ही ब्रह्माण्ड की रचना की थी। माँ का यह स्वरूप अजन्मा और आद्यशक्ति से भरपूर है। माता का निवास सूर्यलोक में बताया गया है। वहाँ निवास करने की क्षमता एवं शक्ति केवल माँ में ही है। माँ के स्वरूप में भी हमें वही चमक, कांति और तेज देदीप्यमान होता है। माँ को अष्टभुजा देवी बताया गया है। इनके हाथों में कमण्डल, धनुष, बाण, कमल का फूल, अमृत कलश, चक्र और गदा एवं आठवें हाथ में समस्त निधियाँ एवं सिद्धियाँ देने वाली जपमाला है। माँ का यह स्वरूप ध्येय की पूर्णता को भी बताता है। माँ को प्राणशक्ति और बुद्धि की प्रदाता भी कहा गया है। यह सृष्टि परमात्मा की शक्ति से ही चलायमान है। बीज से ही वृक्ष बनता है और अंडे से ही जीव जन्म लेता है। सृष्टि के मूल में ही समस्त ऊर्जा विद्यमान है, जो उस परम शक्ति का सूक्ष्म रूप दिखाई देता है। माँ की आराधना हमारी प्राणशक्ति को ऊर्जावान बनाती है। नवरात्रि के प्रथम दिवस हमनें दृढ़ता, द्वितीय दिवस सद्चरित्रता, तृतीय दिवस मन की एकाग्रता एवं चतुर्थ दिवस हमनें असीमित ऊर्जाप्रवाह और तेज प्राप्त किया है। माँ कूष्मांडा तो आदिस्वरूपा और जगतजननी है। सच्चे मन से माँ के इस अलौकिक और तेजस्वी रूप की आराधना करें। माँ की अतुलनीय कृपा हमें अवश्य प्राप्त होगी।

About Post Author

आपने शायद इसे नहीं पढ़ा

Subscribe to get news in your inbox