Maha Shivaratri 2026: कब करें पूजा और जलाभिषेक? जानिए संपूर्ण शुभ मुहूर्त

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April 17, 2026

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नई दिल्ली/उमा सक्सेना/-    महाशिवरात्रि का पावन पर्व इस वर्ष 15 फरवरी 2026, रविवार को श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाएगा। यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य मिलन का प्रतीक माना जाता है। देशभर के शिवालयों में विशेष पूजन, रात्रि जागरण, भजन-कीर्तन और शिव बारात जैसे धार्मिक आयोजन होंगे। भक्तगण इस अवसर पर शिवलिंग पर बेलपत्र, दूध, शहद, चंदन और गंगाजल अर्पित कर महादेव का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से किया गया जलाभिषेक और रुद्राभिषेक जीवन के कष्टों को दूर कर सुख-समृद्धि प्रदान करता है।

तिथि और पर्व का निर्धारण
फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि का आरंभ 15 फरवरी 2026 को शाम 5 बजकर 4 मिनट पर होगा और इसका समापन 16 फरवरी 2026 को शाम 5 बजकर 34 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार इस बार महाशिवरात्रि 15 फरवरी को ही मनाई जाएगी।

चार प्रहर की पूजा का समय
महाशिवरात्रि की रात्रि में चार प्रहर की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है—
प्रथम प्रहर: शाम 6:39 से रात 9:45 तक

द्वितीय प्रहर: रात 9:45 से 12:52 तक

तृतीय प्रहर: रात 12:52 से सुबह 3:59 तक

चतुर्थ प्रहर: सुबह 3:59 से 7:06 तक

इन चारों प्रहरों में अलग-अलग मंत्रों के जाप का विधान है—
प्रथम प्रहर: ‘ह्रीं ईशानाय नमः’

द्वितीय प्रहर: ‘ह्रीं अघोराय नमः’

तृतीय प्रहर: ‘ह्रीं वामदेवाय नमः’

चतुर्थ प्रहर: ‘ह्रीं सद्योजाताय नमः’

निशिता काल का महत्व
महाशिवरात्रि पर निशिता काल विशेष रूप से फलदायी माना जाता है। इस वर्ष यह शुभ अवधि रात 11 बजकर 55 मिनट से 12 बजकर 56 मिनट तक रहेगी। इसे भगवान शिव की आराधना, जलाभिषेक और रुद्राभिषेक के लिए सर्वश्रेष्ठ समय माना गया है।

व्रत पारण का समय
व्रत रखने वाले श्रद्धालु 16 फरवरी 2026 को प्रातः 6 बजकर 42 मिनट से दोपहर 3 बजकर 10 मिनट के बीच व्रत का पारण कर सकते हैं।

महाशिवरात्रि केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, संयम और भक्ति का प्रतीक भी है। इस दिन श्रद्धालु उपवास, जप और ध्यान के माध्यम से शिव तत्व से जुड़ने का प्रयास करते हैं।

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