
नई दिल्ली/सिमरन मोरया/- होली का त्योहार आने वाला है, लेकिन इससे ठीक पहले होलाष्टक की अवधि शुरू हो रही है, जिसे ज्योतिष शास्त्र में अशुभ माना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष अष्टमी से होलाष्टक शुरू होता है और होलिका दहन तक चलता है। साल 2026 में होलाष्टक मंगलवार 24 फरवरी से शुरू होकर अगले मंगलवार 3मार्च तक चलेगा। इस दौरान ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति को अशुभ प्रभाव वाला माना जाता है, इसलिए ऐसे में शुभ और मांगलिक कार्य टालने की सलाह दी जाती है। होलिका दहन 3मार्च को प्रदोष काल में होगा, तो वहीं, रंग वाली होली 4 मार्च को मनाई जाएगी।
होलाष्टक की यह 8दिनों की अवधि आध्यात्मिक रूप से संवेदनशील मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस समय कोई नया या बड़ा कार्य शुरू नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे नकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं। ज्योतिष विशेषज्ञों का कहना है कि यह समय पुराने काम निपटाने, साधना करने और नकारात्मक ऊर्जा से बचाव के लिए उपयुक्त है।
होलाष्टक में क्या करें?
1. भगवान विष्णु या होलिका की पूजा करें, रामायण या भगवद्गीता का पाठ करें
2. दान-पुण्य बढ़ाएं, गरीबों को भोजन या कपड़े दें
3. घर में साफ-सफाई रखें, नमक और तेल का कम इस्तेमाल करें
4. ध्यान, योग, मंत्र जाप या हनुमान चालीसा का पाठ करें
5. परिवार के साथ समय बिताएं, पुराने विवाद सुलझाएं
6. नकारात्मक विचारों से दूर रहें और सकारात्मक रहें
होलाष्टक में क्या नहीं करना चाहिए?
1. शादी-ब्याह, सगाई, रोका या विवाह संबंधी कोई कार्य
2. गृह प्रवेश, भूमि पूजन, नई संपत्ति या वाहन खरीदना
3. मुंडन संस्कार, नामकरण, जनेऊ या अन्य 16संस्कारों में से कोई
4. नया व्यवसाय शुरू करना, बड़ा निवेश या महत्वपूर्ण अनुबंध पर हस्ताक्षर
5. नई नौकरी जॉइन करना या लंबी यात्रा पर निकलना
6. निर्माण कार्य की शुरुआत या कोई मांगलिक कार्य





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