मरिमाई रोड या मौत का झटका?,अतिक्रमण हटाकर नगर निगम ने जनता को गड्ढों के हवाले किया! विपक्षी पार्षद होने की सजा वार्ड के नागरिकों को क्यों?

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October 2, 2026

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मरिमाई रोड या मौत का झटका?,अतिक्रमण हटाकर नगर निगम ने जनता को गड्ढों के हवाले किया! विपक्षी पार्षद होने की सजा वार्ड के नागरिकों को क्यों?

-शॉर्टकट के चक्कर में निकले तो कमर-रीढ़ का ‘चेकअप’ तय, कई बार के कांग्रेस पार्षद के इलाके में सड़क बेहाल

चुनाव में चमकती सड़कें, चुनाव बाद गड्ढों की सौगात—जनता पूछ रही, आखिर विकास गया कहां?

नजफगढ़ मेट्रो न्यूज/बिलासपुर /राज्य ब्यूरो,। मगरपारा से मरिमाई होते हुए रामा मैग्नेटो मॉल जाने का शॉर्टकट अब लोगों के लिए शॉर्टकट नहीं, झटकों का रास्ता बन चुका है। इस सड़क से गुजरने वाले दोपहिया वाहन चालकों को हर कुछ मीटर पर गड्ढों से जूझना पड़ता है। जरा-सी चूक हुई तो वाहन का संतुलन बिगड़ा और सीधे अस्पताल का रास्ता पकड़ना पड़ सकता है।

तालापारा क्षेत्र के मरिमाई मोहल्ले की सड़क की बदहाली ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सड़क चौड़ीकरण के नाम पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई तो कर दी गई, लेकिन उसके बाद सड़क को व्यवस्थित और दुरुस्त करने की सुध लेने वाला कोई नजर नहीं आ रहा। यानी अतिक्रमण हटाने में तेजी, सड़क बनाने में सुस्ती!

गड्ढे इतने कि सड़क ढूंढना मुश्किल

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सड़क पर जगह-जगह गहरे गड्ढे बन चुके हैं। बारिश के दौरान इनमें पानी भर जाता है और राहगीरों को पता ही नहीं चलता कि सामने सड़क है या गड्ढा। रात के समय समस्या और गंभीर हो जाती है।

नागरिकों के मुताबिक, कई बार दोपहिया वाहन चालक इन गड्ढों में गिरकर चोटिल हो चुके हैं। बावजूद इसके जिम्मेदारों की नींद टूटती दिखाई नहीं दे रही।

कई बार के पार्षद, फिर भी सड़क की यही हालत!

जिस इलाके में जनप्रतिनिधि लंबे समय से जनता का प्रतिनिधित्व करते आ रहे हैं, वहां सड़क की ऐसी हालत होना अपने आप में बड़ा सवाल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वोट मांगने के समय सड़क और विकास के वादे खूब सुनाई देते हैं, लेकिन जीत के बाद वही सड़क जिम्मेदारों की नजर से गायब हो जाती है।

जब अतिक्रमण हटाया जा सकता है तो सड़क क्यों नहीं बनाई जा सकती? चुनाव आते ही सड़क चमकती है, फिर गड्ढों में क्यों बदल जाती है? लोगों में यह चर्चा भी है कि चुनाव के समय सड़कों की मरम्मत और विकास कार्यों को लेकर अचानक सक्रियता बढ़ जाती है। लेकिन चुनाव खत्म होते ही वही सड़कें अपनी बदहाली पर लौट आती हैं।

मरिमाई मार्ग की स्थिति ने इस कथित कार्यशैली पर सवाल खड़ा कर दिया है। क्या जनता को सड़क के लिए भी चुनाव का इंतजार करना पड़ेगा?

नगर निगम बताए—अतिक्रमण हटाने के बाद सड़क निर्माण की जिम्मेदारी किसकी?

सबसे बड़ा सवाल नगर निगम से है कि आखिर अतिक्रमण हटाने के बाद सड़क को दुरुस्त कराने की योजना क्या है? यदि सड़क निर्माण प्रस्तावित है तो काम कब शुरू होगा और यदि नहीं है तो अतिक्रमण हटाने के बाद नागरिकों को इस बदहाल रास्ते के भरोसे क्यों छोड़ दिया गया?

जनता को विकास के भाषण नहीं, चलने लायक सड़क चाहिए। मारिमाई मार्ग की बदहाली अब केवल असुविधा नहीं, बल्कि दुर्घटना का संभावित कारण बन चुकी है। नगर निगम और स्थानीय जनप्रतिनिधि समय रहते जागें, वरना किसी बड़े हादसे के बाद जिम्मेदारी तय करने का कोई मतलब नहीं रह जाएगा।

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