मानसी शर्मा /- कोरोना के खौफ से दुनिया अभी पूरी तरह निकली नहीं थी कि चीन की एक और बीमारी का खतरा बढ़ता ही जा रहा है। भारत में नए चाइनीज बैक्टीरिया माइक्रोप्लाजमा न्यूमोनिया के केस मिले हैं। दरअसल, दिल्ली एम्स में अप्रैल से सितंबर के बीच 7 केस मिल चुके हैं। पीसीआर और आईजीएम एलिसा परीक्षणों की पॉजिटिविटी रेट तीन और 16 प्रतिशत पाया गया है। यही कारण है कि चीन से आए कोरोना को झेलने के बाद भारत में अब इस बीमारी को लेकर खौफ फैलने लगा है।
लैंसेट माइक्रोब में प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा गया है कि एक मामले की जांच संक्रमण के शुरुआती चरण में किए गए पीसीआर टेस्ट में जबकि बाकी छह मामलों का पता आईजीएम एलिसा परीक्षण के जरिए लगाया था। एम्स दिल्ली में माइक्रोबायोलॉजी विभाग के पूर्व प्रमुख और कंसोर्टियम की सदस्य डॉ रामा चौधरी ने एक अंग्रेजी अखबार को बताया कि माइकोप्लाज्मा निमोनिया को 15-20% कम्युनिटी एक्वायर्ड निमोनिया का कारण माना जाता है।
ये लक्षण आए सामने
इन मामलों के मिलने की वजह चिंताजनक इसलिए भी है क्योंकि चार साल पहले दिसंबर 2019 में चीन से ही कोविड शुरू हुआ था जो दुनियाभर में फैल गया और अपना आतंक फैलाया। जिन बच्चों को इस बिमारी के लक्षण मिले हैं उनमें आमतौर पर कुछ बेहद सामान्य लक्षण जैसे गला खराब होना, थकान महसूस होना, बुखार, खांसी जो हफ्तों या महीनों तक बनी रह सकती है और सिरदर्द शामिल हैं।
चीन में बीमारी ने मचाई तबाही
बता दें, इस बीमारी के चलते चीन की राजधानी बीजिंग और उसके 500 मील के दायरे में सभी अस्पताल मरीजों से भर गए हैं। अलजजीरा के अनुसार, बीजिंग के एक अस्पताल में इस बीमारी से पीड़ित करीब 1200 मरीज हर दिन इमरजेंसी में भर्ती हो रहे हैं।दूसरी तरफ, वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन ने बताया कि चीन ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सांस से जुड़ी एक बीमारी फैलने की जानकारी दी थी।


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