भाजपा-कांग्रेस की लड़ाई में मजबूत होती आप, क्या कांग्रेस का विकल्प बन रही आप ?

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September 23, 2026

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भाजपा-कांग्रेस की लड़ाई में मजबूत होती आप, क्या कांग्रेस का विकल्प बन रही आप ?

-दिल्ली के बाद पंजाब और अब गुजरात में कांग्रेस की जगह लेने की तैयारी, क्या भाजपा कांग्रेस मुक्त अभियान को आगे बढ़ा रहे केजरीवाल ?

नई दिल्ली/- राजनीति में कब कौन बाजी मार ले यह कहना बहुत ही मुश्किल है लेकिन पिछले कुछ दशकों में राजनीति की तस्वीर भी काफी बदल गई है। अब एक पार्टी दूसरी पार्टी को खत्म करने की कोशिश कर रही है। जिस तरह से भाजपा ने पिछले एक दशक से कांग्रेस मुक्त भारत बनाने का अभियान छेड़ा हुआ है उसी तरह आम आदमी पार्टी भी अब भाजपा के इस अभियान को आगे बढ़ाने में जुटी हुई है और जिन राज्यों में भाजपा-कांग्रेस की आमने-सामने की टक्कर हो रही है वहां कांग्रेस का विकल्प बनने की कोशिश कर रही है।
             बीते कुछ दिनों से अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी सुर्खियों में है। मामला उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के घर पर पड़े सीबीआई से जुड़े छापे है। दरअसल, दिल्ली की नई शराब नीति में हुए घोटाले पर बवाल हो रहा। भाजपा केजरीवाल और आप पर निशाना साध रही है। वहीं, आप इसे दिल्ली के शिक्षा मॉडल पर हमला बता रही है।

 इसके साथ ही आप नेता दावा कर रहे हैं कि 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव में भाजपा का मुकाबला आम आदमी पार्टी से होगा। चर्चा ये भी होने लगी है कि क्या गुजरात चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी पूरे देश में कांग्रेस का विकल्प बनने की कोशिश कर रही है? क्या ये दिल्ली-पंजाब की तरह अन्य राज्यों से भी कांग्रेस को खत्म करने की कोशिश है? क्या भाजपा के कांग्रेस मुक्त अभियान को आप आगे बढ़ा रही है? आइए इसे समझने की कोशिश करते हैं…
                 कांग्रेस देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी है। अभी लोकसभा में उसके 53, राज्यसभा में 31 सदस्य हैं। देशभर में कांग्रेस के 692 विधायक और 43 एमएलसी हैं। वहीं, आम आदमी पार्टी अपने जन्म के बाद महज 10 साल में दो राज्यों में सरकार बन चुकी है। कई राज्यों में उसकी मजबूत दावेदारी है। अभी आप के 10 राज्यसभा सांसद हैं। 156 विधायक हैं।’
                 राजनीति के विशेषज्ञों की माने तो ’जहां भी कांग्रेस सत्ता में रही है, वहां आम आदमी पार्टी मजबूत विकल्प के तौर पर उभरी है। दिल्ली, पंजाब इसके उदाहरण हैं। गुजरात, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड जैसे राज्यों में कांग्रेस की सीधी लड़ाई भाजपा से होती है। यहां भी आम आदमी पार्टी ने खुद का तेजी से विस्तार करना शुरू किया। उत्तराखंड में आप को सफलता नहीं मिली, लेकिन पूरे चुनाव में आप की चर्चा खूब रही। अब केजरीवाल की नजर हिमाचल प्रदेश और गुजरात पर है। यहां भी आप ने कांग्रेस को किनारे करके मुख्य लड़ाई आप और भाजपा के बीच में करने की कोशिश शुरू कर दी है।’


क्या वाकई आप की वजह से खत्म हो रही कांग्रेस?
इसे कुछ इस तरह समझें-

1. पंजाब में आप ने कांग्रेस से छीनी सत्ता : पंजाब में भारतीय जनता पार्टी की स्थिति पहले भी ज्यादा अच्छी नहीं थी। यहां की क्षेत्रीय पार्टी शिरोमणि अकाली दल भी कुछ खास नहीं कर पाई। आम आदमी पार्टी ही यहां कांग्रेस का विकल्प बनी। वह भी ऐसी कि कांग्रेस पूरी तरह से साफ ही हो गई। इस बार चुनाव में पंजाब की 117 में से 92 सीटों पर आम आदमी पार्टी ने कब्जा जमाया, जबकि कांग्रेस 77 से 18 पर आकर सिमट गई। भाजपा को दो और शिरोमणिक अकाली दल को तीन सीटों पर जीत मिली। 2017 में पंजाब में आम आदमी पार्टी को 20 सीट पर जीत मिली थी। ये आंकड़े साफ बता रहे हैं कि कैसे अरविंद केजरीवाल ने पंजाब में कांग्रेस को साफ कर दिया।

2. गोवा-मध्य प्रदेश में चला झाडू़ः गोवा-मध्य प्रदेश में भी आम आदमी पार्टी मजबूत होती दिखी। गोवा में पहली बार आम आदमी पार्टी के दो विधायक चुनाव जीते। इनमें एक सीट पर 2017 में कांग्रेस जबकि दूसरे पर एनसीपी की जीत हुई थी। मतलब ये दोनों सीटों पर गैर भाजपाई दलों को नुकसान हुआ। गोवा की करीब 25 ऐसी सीटें थीं, जहां आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस का ही वोट काटा। इसका फायदा भाजपा को मिल गया।

वहीं, मध्य प्रदेश की बात करें तो यहां पहली बार आम आदमी पार्टी का मेयर बना है। सिंगरौली में आप प्रत्याशी रानी अग्रवाल ने भाजपा के उम्मीदवार को हराया। रानी भाजपा की नेता रह चुकी हैं। हालांकि, जब ओवरऑल आंकड़ों को देखते हैं तो यहां भी आम आदमी पार्टी ने करीब 60 से ज्यादा वार्डों में कांग्रेस का खेल बिगाड़ा।

बुरहानपुर, खंडवा और उज्जैन में मेयर सीट पर भाजपा की जीत हुई। इन तीनों सीटों पर भी आम आदमी पार्टी और एआईएमआईएम की वजह से ही कांग्रेस की हार हुई। बुरहानपुर में एआईएमआईएम प्रत्याशी को 10 हजार से ज्यादा वोट मिले। इसी तरह उज्जैन में भाजपा उम्मीदवार केवल 736 वोटों से जीती। 

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