भविष्य के युद्धों में ड्रोन होंगे गेमचेंजर: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का बड़ा बयान

स्वामी,मुद्रक एवं प्रमुख संपादक

शिव कुमार यादव

वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी

संपादक

भावना शर्मा

पत्रकार एवं समाजसेवी

प्रबन्धक

Birendra Kumar

बिरेन्द्र कुमार

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आईटी प्रबंधक

Categories

August 2026
M T W T F S S
 12
3456789
10111213141516
17181920212223
24252627282930
31  
August 21, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

-राष्ट्रीय रक्षा उद्योग सम्मेलन में आत्मनिर्भर भारत पर जोर

नई दिल्ली/उमा सक्सेना/-   नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय रक्षा उद्योग सम्मेलन के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारत की रक्षा तैयारियों को लेकर अहम बातें कहीं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में युद्ध का स्वरूप पूरी तरह बदलने वाला है, जिसमें ड्रोन और एंटी-ड्रोन तकनीक निर्णायक भूमिका निभाएंगी। इस अवसर पर उन्होंने ‘डिफेंस इंडिया स्टार्ट-अप चैलेंज’ के नए संस्करण की भी शुरुआत की, जिसमें 100 से अधिक नई चुनौतियां शामिल की गई हैं। उन्होंने नवाचार को बढ़ावा देने के लिए सभी स्टार्टअप्स और इनोवेटर्स को आगे आने का आह्वान किया।

MSMEs और स्टार्टअप्स की बढ़ेगी भागीदारी
रक्षा मंत्री ने कहा कि देश की रक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए बड़े उद्योगों के साथ-साथ छोटे और मध्यम उद्योगों (MSMEs) को भी सप्लाई चेन से जोड़ना बेहद जरूरी है। उनका मानना है कि जब छोटे उद्योग रक्षा क्षेत्र का हिस्सा बनेंगे, तभी देश में तकनीकी विकास और नवाचार को गति मिलेगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार इस दिशा में नीतिगत समर्थन देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

ड्रोन और एंटी-ड्रोन तकनीक की बढ़ती अहमियत
वैश्विक परिस्थितियों का जिक्र करते हुए उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध और ईरान-इजराइल तनाव का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि इन संघर्षों ने यह साबित कर दिया है कि भविष्य के युद्धों में ड्रोन तकनीक सबसे अहम हथियार बनकर उभरेगी। ऐसे में भारत को इस क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ना होगा और अपनी क्षमताओं को मजबूत करना होगा।

हर पुर्जे में ‘मेड इन इंडिया’ का लक्ष्य
रक्षा मंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि आत्मनिर्भरता केवल तैयार उत्पाद तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि ड्रोन के हर हिस्से—जैसे सॉफ्टवेयर, इंजन, बैटरी और संरचना—का निर्माण भारत में ही होना चाहिए। उन्होंने स्वीकार किया कि वर्तमान में कई देश ड्रोन के लिए जरूरी पुर्जों के लिए चीन पर निर्भर हैं, लेकिन भारत को अपनी रणनीतिक सुरक्षा के लिए इस निर्भरता से बाहर निकलना होगा।

2030 तक भारत बनेगा ड्रोन निर्माण का वैश्विक केंद्र
रक्षा मंत्री ने यह भी बताया कि सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक भारत को ड्रोन निर्माण का वैश्विक हब बनाना है। इसके लिए ऑटोमेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोटिक्स जैसी आधुनिक तकनीकों को तेजी से अपनाया जा रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इस मिशन को सफल बनाने के लिए सरकार हर संभव सहायता प्रदान करेगी।

About Post Author

आपने शायद इसे नहीं पढ़ा

Subscribe to get news in your inbox