ब्रिटिश अखबार के लेख में दावा, ’2024 लोकसभा चुनाव में पीएम मोदी को रोकना लगभग असंभव’

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ब्रिटिश अखबार के लेख में दावा, ’2024 लोकसभा चुनाव में पीएम मोदी को रोकना लगभग असंभव’

-लेखिका के मुताबिक, तीन राज्यों के विधानसभा चुनावों में मिली जीत से बढ़ी पीएम मोदी का लोकप्रियता

लंदन/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/- लोकसभा चुनाव में कुछ ही माह का समय बचा है और सभी राजनीतिक पार्टियां आम चुनाव की तैयारियों में जुटी हैं। इस बीच ब्रिटेन के प्रमुख अखबार द गार्जियन में एक लेख लिखा गया है, जिससे विपक्षी पार्टियों को निराशा हो सकती है। दरअसल लेख में दावा किया गया है कि ’2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की सरकार बनना तय है और इसे कोई नहीं रोक सकता।’

’भाजपा को रोकना लगभग असंभव’
यह लेख हन्नाह एलिस पीटरसन ने लिखा है। पीटरसन लिखती हैं कि ’तीन राज्यों के विधानसभा चुनाव में मिली जीत से मिले आत्मविश्वास, पीएम मोदी की लोकप्रियता और राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के चलते भाजपा का लगातार तीसरी बार सत्ता में आना तय है और इसे रोकना लगभग असंभव है।

तीन राज्यों में मिली जीत के बाद खुद पीएम मोदी भी 2024 में जीत की भविष्यवाणी करने से खुद को नहीं रोक पाए।’ लेख के अनुसार, भारत के मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य और राजनीतिक विश्लेषकों के बीच एक तरह की सहमति है कि पीएम मोदी और भाजपा की जीत होनी तय है।

’भाजपा के हिंदुत्व और राष्ट्रवाद के एजेंडे से मतदाता प्रभावित’
पीटरसन लिखती हैं कि ’प्रधानमंत्री की लोकप्रियता और उनकी मजबूत नेता की छवि के साथ ही भाजपा के हिंदू राष्ट्रवादी एजेंडे से बड़ी संख्या में हिंदू मतदाता प्रभावित हैं, खासकर उत्तर भारत की हिंदी बेल्ट में भाजपा खास तौर पर मतदाताओं को लुभा रही है। साल 2014 के बाद से राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर पर देश का जनमत बड़े पैमाने पर भाजपा की तरफ झुका है।’ लेख में लिखा गया है कि ’भारत के दक्षिण और पूर्व के हिस्से में विपक्षी पार्टियां भाजपा के मुकाबले मजबूत हैं लेकिन राष्ट्रीय तौर पर विपक्ष बिखरा हुआ और कमजोर नजर आ रहा है।’

’विपक्षी गठबंधन का कई अहम मुद्दों पर एक होना बाकी’
गार्जियन के लेख में कांग्रेस को लेकर लिखा गया है कि ’भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस हालिया विधानसभा चुनाव में तेलंगाना में जीती है लेकिन यह अभी तीन राज्यों में ही सत्ता में है और पार्टी अंदरुनी कलह से जूझ रही है। विपक्षी पार्टियों ने गठबंधन किया है लेकिन अभी भी विपक्षी पार्टियों को कई अहम मुद्दों पर सहमत होना बाकी है। हालांकि ये सभी पार्टियों भाजपा के खिलाफ लड़ने एकजुट होकर लड़ने की बात कर रही हैं। सामान्य सोच यही है कि अभी भाजपा की जीत तय लग रही है।’

लेख के अनुसार, ’पीएम मोदी साल 2014 में सत्ता विरोधी लहर के सहारे सत्ता में आए थे। वहीं 2019 की जीत में आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान पर एयरस्ट्राइक के चलते राष्ट्रीय सुरक्षा का भाव उनके पक्ष में गया और उन्हें जीत मिली। हालांकि यह साफ नहीं है कि क्या भाजपा इस बार 2019 के बहुमत को दोहरा पाएगी या नहीं। भाजपा की राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में जीत पीएम मोदी की लोकप्रियता का सबूत है। विधानसभा चुनाव में भाजपा ने रणनीतिक रूप से प्रधानमंत्री के चेहरे को प्राथमिकता दी ना कि स्थानीय नेताओं को। प्रधानमंत्री ने विधानसभा चुनाव में दर्जनों रैलियां की और खुद लोगों से पार्टी के लिए वोट मांगा। पीएम मोदी की वोट की अपील का आधार भाजपा सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के साथ ही उनका राष्ट्रवादी एजेंडा रहा।’

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