बिहार के बाद अब आंध्र प्रदेश में होगी जातीय जनगणना

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April 15, 2026

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बिहार के बाद अब आंध्र प्रदेश में होगी जातीय जनगणना

मानसी शर्मा /- सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री सी श्रीनिवास वेणुगोपाल कृष्ण ने जाति जनगणना को लेकर बड़ी जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश सरकार 9 दिसंबर को व्यापक जाति जनगणना शुरू करेगी। मंत्री ने कहा कि जाति जनगणना को पूरा करना वाईएसआरसीपी सरकार का मुख्य लक्ष्य है।

श्रीनिवास वेणुगोपाल ने कहा, ‘लोगों के जीवन स्तर में बदलाव के लिए जाति जनगणना कराना जरूरी है। आज़ादी के बाद भारत में केवल जनसंख्या जनगणना ही हुई है, जातिगत जनगणना कभी नहीं हुई। उन्होंने कहा कि राज्य में जाति जनगणना निष्पक्ष एवं व्यापक तरीके से करायी जायेगी।

मंत्री ने कहा कि आंध्र प्रदेश की यह जातीय जनगणना पूरे देश के लिए एक रोल मॉडल साबित होगी। उन्होंने दावा किया कि विपक्षी दल इस कदम से कांप रहे हैं। प्रारंभ में जाति जनगणना में 139 पिछड़े वर्गों को शामिल करने की घोषणा की गई थी, लेकिन इस बार इसमें आंध्र प्रदेश की सभी जातियां शामिल हैं।

भारत में जनगणना कब और कैसे शुरू हुई?

ब्रिटिश सरकार ने भारत में पहली बार जनगणना साल 1872 में शुरू की थी। 1872 से 1931 तक हुई सभी जनगणनाओं में जाति के हिसाब से आंकड़े भी दर्ज किये जाते थे। आज़ादी के बाद जब 1951 में पहली जनगणना हुई तो जाति संबंधी आँकड़े केवल अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति तक ही सीमित थे।

देश में आखिरी बार कब हुई थी जातीय जनगणना?

बता दें कि जातीय जनगणना आजाद भारत में एक बार भी नहीं हुई थी। आखिरी बार साल 1931 में ब्रिटिश हुकुमत के दौरान ही जाति के आधार पर जनसंख्या के आंकड़े इकट्ठे किए गए थे। इसके बाद कभी भी जाति के आधार पर जनसंख्या के आंकडे़ जारी नहीं हुए हैं। वैसे तो सबसे पहले 1881 में जनगणना हुई थी और उसके बाद हर 10 साल में जनगणना होती गई, लेकिन 1931 के बाद जाति के आधार पर जनगणना के आंकड़ें सामने नहीं आए। 1931 के बाद 1941 को जाति के आधार पर जनगणना तो हुई थी, लेकिन इसके आंकड़ें सार्वजनिक नहीं किए गए। इसके बाद भारत आजाद हो गया और फिर 1951 में आजाद भारत की पहली जनगणना करवाई गई।

हालांकि, इस दौरान ही ये फैसला ले लिया गया था कि अब जाति के आधार पर जनसंख्या की गिनती नहीं होगी। लेकिन, जनगणना में सिर्फ एससी और एसटी के आंकड़ें जारी होते हैं और अन्य जातियों की कोई जानकारी नहीं दी जाती है। लेकिन, अगर बिहार में जाति के आधार पर जनगणना होती है तो आजाद भारत में पहली बार ऐसा होगा।

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