बांग्लादेश में टैगोर के पैतृक आवास पर हमला, पांच गिरफ्तार

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August 24, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

बांग्लादेश में टैगोर के पैतृक आवास पर हमला, पांच गिरफ्तार

अनीशा चौहान/-  बांग्लादेश के सिराजगंज जिले के शाहजादपुर में स्थित रवींद्रनाथ टैगोर के पैतृक आवास ‘रवींद्र कचहरीबारी’ में 8 जून को हुई तोड़फोड़ की घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता और नाराज़गी पैदा कर दी है। इस ऐतिहासिक धरोहर पर हुए हमले के बाद बांग्लादेश पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए पाँच लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि 50 से 60 अन्य अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ आपराधिक मामला दर्ज किया गया है।

जांच समिति का गठन

बांग्लादेश सरकार के पुरातत्व विभाग ने इस घटना की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की है, जिसे पाँच दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है। वहीं भारत सरकार ने इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे रवींद्रनाथ टैगोर की स्मृति और सांस्कृतिक विरासत पर हमला बताया है।

घटना का विवरण

यह घटना उस समय हुई जब एक आगंतुक और उनके परिवार के साथ मोटरसाइकिल पार्किंग शुल्क को लेकर संग्रहालय कर्मियों के बीच कहासुनी हो गई। स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, आगंतुक के साथ कथित तौर पर मारपीट की गई और उन्हें एक कमरे में बंद कर दिया गया। इस घटना से नाराज़ स्थानीय लोगों ने 10 जून को विरोध प्रदर्शन किया, जो देखते ही देखते हिंसक रूप ले गया।

प्रदर्शनकारियों की भीड़ ने रवींद्र कचहरीबारी के सभागार में तोड़फोड़ की, खिड़कियों और फर्नीचर को नुकसान पहुँचाया और एक वरिष्ठ अधिकारी पर हमला भी किया। इस दौरान भीड़ ने रवींद्रनाथ टैगोर के ख़िलाफ़ आपत्तिजनक नारेबाज़ी की, जिससे स्थिति और अधिक संवेदनशील हो गई।

स्मृति स्थल अस्थायी रूप से बंद, अब पुनः खुला

घटना के बाद कचहरीबारी के संरक्षक मोहम्मद हबीबुर रहमान ने बताया कि सुरक्षा कारणों से स्थल को कुछ दिनों के लिए आगंतुकों के लिए बंद कर दिया गया था। हालांकि, 13 जून को यह स्थल दोबारा आम जनता के लिए खोल दिया गया। बांग्लादेश के सांस्कृतिक मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि टैगोर की किसी भी महत्वपूर्ण कृति या अवशेष को कोई नुकसान नहीं हुआ है।

इतिहास और महत्त्व

रवींद्र कचहरीबारी न केवल एक भवन है, बल्कि यह रवींद्रनाथ टैगोर के जीवन और साहित्यिक यात्रा का अहम पड़ाव रहा है। यह भवन 1840 में उनके दादा द्वारकानाथ टैगोर ने खरीदा था। रवींद्रनाथ टैगोर ने 1890 के दशक में यहाँ रहते हुए ‘सोनार तोरी’, ‘चैताली’, और ‘बिसर्जन’ जैसी कालजयी रचनाएँ रची थीं।

यह हमला सिर्फ़ एक ऐतिहासिक इमारत पर नहीं, बल्कि बांग्लादेश और भारत की साझा सांस्कृतिक विरासत पर भी एक गहरा आघात है। अब देखना होगा कि जांच समिति की रिपोर्ट और सरकार की आगे की कार्रवाई से क्या निष्कर्ष निकलते हैं।

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