पीएम मोदी ने मनाई राजेंद्र चोल की जयंती, स्मारक सिक्का किया जारी, आदि तिरुवथिरा उत्सव में हुए शामिल

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August 24, 2026

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पीएम मोदी ने मनाई राजेंद्र चोल की जयंती, स्मारक सिक्का किया जारी, आदि तिरुवथिरा उत्सव में हुए शामिल

अनीशा चौहान/-  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज 27 जुलाई को तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली स्थित गंगईकोंडा चोलपुरम मंदिर में आयोजित आदि तिरुवथिराई उत्सव के समापन समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने महान चोल सम्राट राजेंद्र चोल प्रथम की जयंती समारोह में भाग लिया और उनकी स्मृति में एक स्मारक सिक्के का विमोचन भी किया।

आदि तिरुवथिराउत्सव का महत्व
आदि तिरुवथिराई उत्सव तमिल शैव भक्ति परंपरा का एक महत्वपूर्ण और जीवंत पर्व है। इस उत्सव को चोल वंश ने ऐतिहासिक काल में संरक्षण और प्रोत्साहन दिया था। इस वर्ष का उत्सव विशेष रूप से इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह राजेंद्र चोल प्रथम के जन्म नक्षत्र ‘तिरुवथिरा’ (आर्द्रा) के साथ संयोग में आया है। इस समारोह के दौरान तमिल कला और संस्कृति की समृद्ध विरासत का प्रदर्शन किया गया। इसमें थेरुकुथु, थप्पट्टम, करगम, कावड़ी जैसे पारंपरिक लोकनृत्य, भरतनाट्यम की प्रस्तुतियां और तमिल भक्ति गीतों का गायन प्रमुख आकर्षण रहे। कलाक्षेत्र फाउंडेशन द्वारा एक विशेष भरतनाट्यम प्रस्तुति दी गई, और पारंपरिक ओथुवरों द्वारा देवराम थिरुमुराई का गायन किया गया।इसके अतिरिक्त, साहित्य अकादमी द्वारा प्रकाशित देवराम भजनों की एक पुस्तिका का विमोचन भी इस समारोह का हिस्सा रहा।

राजेंद्र चोल प्रथम का ऐतिहासिक योगदान
राजेंद्र चोल प्रथम (1014-1044 ई.) चोल साम्राज्य के सर्वाधिक प्रभावशाली शासकों में से एक माने जाते हैं। उन्होंने दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में चोल साम्राज्य का विस्तार किया और अपने शासनकाल में चोलों को सांस्कृतिक, आर्थिक और सैन्य दृष्टि से नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनकी नौसेना शक्ति ने श्रीलंका, मालदीव, और श्रीविजय साम्राज्य (वर्तमान इंडोनेशिया, मलेशिया) जैसे क्षेत्रों में विजय अभियान चलाए। उनके शासन में बना गंगईकोंडा चोलपुरम मंदिर और चोगंगम झील जैसे स्थापत्य चमत्कार आज भी उनकी दूरदर्शिता, भव्यता और प्रशासनिक कुशलता के प्रतीक हैं। प्रधानमंत्री मोदी की उपस्थिति और स्मारक सिक्के के विमोचन के माध्यम से इस महापुरुष की विरासत और योगदान को सम्मानित किया गया है, जिससे आने वाली पीढ़ियों को भी उनके गौरवशाली इतिहास से प्रेरणा मिलेगी।

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