नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/- हिंद-प्रशांत द्वीप सहयोग मंच के तीसरे शिखर सम्मेलन में शामिल होने पापुआ न्यू गिनी के पोर्ट मोरेस्बी पहुंचे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को लंच की मेजबानी की। मध्याह्न भोजन (लंच) के इस कार्यक्रम में सम्मेलन में भाग ले रहे अन्य सभी नेता शामिल हुए। इस लंच में विशेष रूप से भारतीय मोटे अनाज से बने व्यंजनों को शामिल किया गया था।
नेताओं ने मोटे अनाज, सब्जियों के सूप और मलाई कोफ्ता का लिया आनंद
मोदी ने पापुआ न्यू गिनी के अपने समकक्ष जेम्स मारापे के साथ मिलकर यहां अहम शिखर सम्मेलन की मेजबानी की। मोदी पापुआ न्यू गिनी की यात्रा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं। इस मध्याह्न भोजन के दौरान नेताओं ने खांडवी, मोटे अनाज और सब्जियों के सूप, मलाई कोफ्ता, राजस्थानी रागी गट्टा करी, दाल पंचमेल, बाजरा बिरयानी, फुल्का और मसाला छाछ का आनंद लिया। पान कुल्फी और मालपुआ भी परोसा गया। इस दौरान पेय पदार्थों में मसाला चाय, ग्रीन टी, पुदीने की चाय और ताजा पिसी गई पीएनजी की कॉफी को भी शामिल किया गया।

2023 को अंतरराष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष किया गया है घोषित
मध्याह्न भोजन में मोटे अनाज को शामिल किया जाना भारत की ओर से श्रीअन्न यानी मिलेट्स या मोटे अनाज को दी जाने वाली महत्ता को दर्शाता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने मार्च 2021 में भारत सरकार के कहने पर 2023 को अंतरराष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष घोषित किया था। मोटा अनाज मानव जाति के लिए ज्ञात सबसे पुराने खाद्य पदार्थों में से एक है। इसे शुष्क भूमि पर बहुत कम निवेश के साथ उगाया जा सकता है और जलवायु परिवर्तन के लिहाज से भी इसकी खेती उपयुक्त है।
इसकी खेती आत्म निर्भरता बढ़ाने और आयातित खाद्यान्नों पर निर्भरता को कम करने का उचित समाधान है। मोटा अनाज बाजरा प्रोटीन, खनिज और अन्य पोषक तत्वों से भरपूर होता है तथा रक्त शर्करा एवं कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में मदद करता है।


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