नन्हे-मुन्नों का योग बन रहा बड़ों के लिए प्रेरणा, अब कोेरोना से जीतेगा देश, बच्चे योग के जरीये बढ़ा रहे इम्यूनिटी

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नन्हे-मुन्नों का योग बन रहा बड़ों के लिए प्रेरणा, अब कोेरोना से जीतेगा देश, बच्चे योग के जरीये बढ़ा रहे इम्यूनिटी

-योग दिवस की पूर्व बेला पर बच्चे दिखा रहे अपना हुनर, विभिन्न योगासनों के जरीये विश्व को दे रहे स्वस्थ रहने का संदेश

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/द्वारका/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/भावना शर्मा/- कोरोना के चलते पूरी दुनिया में हाहाकार मचा हुआ है। हर दिन कोरोना को लेकर कोई न कोई नई खबर सामने आ रही हैं हालांकि कोरोना से बचाव के लिए अब बाजार में वैक्सीन आ गई है लेकिन फिर भी विशेषज्ञ स्वयं की शारीरिक इम्यूनिटी को ही कोरोना से लड़नंे का आधार बता रहे हैं। इसके लिए नियमित योगा व व्यायाम के साथ-साथ पौष्ठिक भोजन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। हालांकि देश में कोरोना की दुसरी लहर भी आ चुकी है और अब तीसरी लहर की संभावना काफी प्रबल हो चली है जिसे देखते हुए सरकार व परिवार सभी अपनों की सुरक्षा के लिए तमाम वो उपाय कर रहे है जिससे बच्चों व बुजुर्गो को तीसरी लहर की चपेट से बचाया जा सके। लेकिन हमारे लिए सबसे अच्छी खबर यही है कि कोरोना काॅल में हमारे बच्चों ने घर में रहकर योगा में पारंगता हासिल कर ली है। बच्चे अब न केवल योग के माध्यम से अपनी इम्यूनिटी बढ़ा रहे है बल्कि विभिन्न योगासनों के जरीये पूरे विष्व को भी स्वरूथ रहने का संदेश दे रहे है। वहीं नन्हे-मुन्नो का योग अब बड़ों के लिए भी प्रेरणा बना रहा है और बच्चें व बड़े उनके साथ योग करने लगे हैं।
                         योग दिवस की पूर्व बेला पर बहादुरगढ़ के बालौर गांव के दो बच्चों जयवर्धन राव 10 साल व द्रिशिता राव 3 साल ने योग में अपना हुनर दिखाते हुए कोरोना से देश के जीतने की बात कही है। दोनो बच्चों ने विभिन्न योगमुद्राओं के जरीये न केवल विश्व को स्वस्थ रहने का संदेश दिया है बल्कि सभी से नियमित योग करने की भी अपील की है। दरअसल कोरोना काल में जब बच्चों के स्कूल बंद हो गये और बच्चे घरों में बंद हो गये तो जयवर्धन व द्रिशिता ने अपने दादा के साथ योग करना शुरू किया और धीरे-धीरे स्चयं भी योग में पारंगत हो गये। उनकी योग मुद्राओं को देखकर अब दूसर ेबच्चे भी उनके पास आने लगे है और उनके साथ योग करना सीख रहे है। इतना ही नही है दोनों भाई-बहन योग के साथ-साथ पेंटिंग्स में भी हाथ आजमा रहे है और एक से बढ़कर एक पेंटिंग्स बनाकर परिवार व गांव वालों का घ्यान अपनी तरफ खींच रहे है। हालांकि शुरू में पढ़ाई की जगह पेंटिंग्स व योगा को लेकर उनकों अपने माता-पिता के गुस्से से भी दो-चार होना पड़ा लेकिन फिर सब ठीक हो गया और परिजनों ने भी योगा के महत्व को जानेते हुए बच्चों को स्वयं सुबह समय से उठाना शुरू कर दिया। बच्चों की प्रतिभा को देखकर अब माता-पिता भी उनके साथ अपने विचार सांझा करने लगे है और बच्चों के लिए विशेषज्ञों से भी बात करने लगे है ताकि उनकी इस प्रतिभा को और उभारा जा सके और वो सही ढ़ंग से योग कर सके। द्रिशिता के पिता मनमोहन राव व मम्मी भावना यादव का कहना है कि वह बेटी को यूं योग कर काफी आश्चर्य चकित है कि एक नन्ही सी परी किस तरह शरीर को तोड़-मरेाड़ रही है जबकि अभी उसने ढ़ंग से स्वयं गिलास में दूध डालकर भी पीना नही सीखा है। मनमोहन चाहते हे कि बेटी इसी तरह हर काम में पारंगत बने चाहे इसके लिए उन्हे कुछ भी करना पड़े। वही जयवर्धन के पापा सिद्धार्थ राव व मम्मी संध्या यादव का कहना है कि जयवर्धन सुबह उठकर अपने दादा के साथ योगा व व्यायाम करने की कोशिश करता था। हालांकि शुरू-शुरू में हम उसे ये सब करने से डांटते थे क्योकि फिर वह पढ़ाई नही करता था लेकिन अब उसका योगा में हुनर देखकर हम भी चकित रह गये है और अव हम भी उसके साथ योगा करने की कोशिश करते है।
                       हालांकि कोरोना की तीसरी लहर बच्चों के लिए खतरनाक होने की संभावना जताई जा रही है लेकिन अब हमारे देश के नन्हे-मुन्नों ने योगा की बागडोर अपने हाथों में संभाल ली है जिसके बाद अब कोरोना भी उनका कुछ नही बिगाड़ पायेगा। अब बच्चे घर में पढ़ाई के साथ-साथ अपनी इम्यूनिटी के लिए भी सजग हो गये है और जैसे-तैसे कर योगा व व्यायाम में भी हाथ आजमाने लगे है। हालांकि बड़े कोरोना काल में आलसी हो गये है तो वहीं छोटे अब अपने हुनर से बड़ों को सीख दे रहे है। जिसको देखते हुए अब लोग कहने लगे है कि कोरोना हारेगा और देश जीतेगा क्योकि अब कोरोना के खिलाफ बच्चों ने जंग छेड़ दी है और बच्चे अपनी इम्यूनिटी के लिए वैक्सीन व दवाईयों पर निर्भर ना होकर योग व व्यायाम पर अपना विश्वास जमा रहे है। दोनोें बच्चों के इस हुनर पर गांव के सरपंच व नेहरू युवा केंद्र दक्षिण-पश्चिम ने उन्हे योग दिवस पर सम्मानित करने की घोषणा की है।

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