नजफगढ़ एसडीएम कार्यालय का किसानों ने किया घेराव, एमएसपी पर फसल खरीद के लिए दिया ज्ञापन

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October 20, 2026

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नजफगढ़ एसडीएम कार्यालय का किसानों ने किया घेराव, एमएसपी पर फसल खरीद के लिए दिया ज्ञापन

-नजफगढ़ देहात के किसानों की फसल खरीदेगी सरकारी एजेंसियां, एसडीएम नजफगढ़ ने भारतीय किसान यूनियन के सदस्यों को दिया आश्वासन

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नजफगढ़/शिव कुमार यादव/- सोमवार को भारतीय किसान यूनियन दिल्ली प्रदेश के नेतृत्व में नजफगढ़ देहात के किसानों ने एसडीएम नजफगढ कार्यालय का घेराव किया। इस मौके पर किसान विरोध स्वरूप अपनी फसल से भरे ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर एसडीएम कार्यालय पंहुचें। किसानों ने सरकार के खिलाफ नारे बाजी की और अपने खिलाफ हो रहे अत्याचार व अन्याय की बात मीडिया के सामने रखते हुए एसडीएम को अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा।

                    किसानों से बात करने के बाद एसडीएम प्रतीक यादव ने किसान नेताओं व किसानों को आश्वस्त करते हुए कहा कि वह सरकार को इस बारें में लिखेंगे और किसानों की एमएसपी पर फसल खरीद की सुविधा नजफगढ़ मंडी में करायेंगे। बता दें कि नजफगढ़ मंडी पिछले साल एफसीआई ने एमएसपी पर गेंहू व सरसों की खरीद की थी। इसमें पश्चिमी दिल्ली के सांसद प्रवेश वर्मा ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया था। सोमवार को भाकियू के प्रदेश अध्यक्ष विरेन्द्र डागर ने बताया कि 1 अप्रैल से नजफगढ़ व नरेला मंडियों में आनी शुरू हो गई है। लेकिन अभी तक कोई सरकारी एजेंसी किसानों की फसल खरीदने के लिए आगे नही आई है। यह किसानों के साथ सरकार का मजाक है। सरकार दिल्ली में किसानों को मिटाने में तुली है।

सरकार को ये भी नही पता कि अभी भी नजफगढ़ देहात में लोगों का मुख्य व्यवसाय खेतीबाड़ी ही है। फिर भी प्रदेश व केंद्र सरकार किसानों की परेशानी नही समझ पा रहे हैं। उन्होने कहा कि सिर्फ दिल्ली का ले-आउट प्लान जारी करने से किसानी व किसान नही मिटेंगे। किसान आज भी खेतीबाड़ी कर ही अपना गुजारा कर रहे हैं। हालांकि एसडीएम प्रतीक यादव ने किसानों को सरकारी एजेंसी से फसल खरीद करने का आश्वासन दिया है। लेकिन यह काम इतना आसान भी नही है क्योंकि अगर सरकार इस मामले में सजग होती तो अब से पहले ही इसकी सारी व्यवस्था हो चुकी होती। किसानों ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर एक सप्ताह में किसानों की फसल सरकारी एजेंसी से नही खरीदी गई तो फिर किसान बड़े स्तर पर अपना विरोध प्रदर्शन करेंगे। 

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