दीपेन्द्र हुड्डा की संसद में मांग: हादसों में ज्यादा पायलट शहीद, रक्षा बजट बढ़ाया जाए

स्वामी,मुद्रक एवं प्रमुख संपादक

शिव कुमार यादव

वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी

संपादक

भावना शर्मा

पत्रकार एवं समाजसेवी

प्रबन्धक

Birendra Kumar

बिरेन्द्र कुमार

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आईटी प्रबंधक

Categories

June 2026
M T W T F S S
1234567
891011121314
15161718192021
22232425262728
2930  
June 18, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

दीपेन्द्र हुड्डा की संसद में मांग: हादसों में ज्यादा पायलट शहीद, रक्षा बजट बढ़ाया जाए

मानसी शर्मा/-   हरियाणा के रोहतक से सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने 93वें वायुसेना दिवस के अवसर पर देश के लिए शहादत देने वाले वीर सैनिकों एवं उनके परिजनों को नमन किया। दीपेन्द्र हुड्डा ने सरकार से मांग करी कि भारतीय वायुसेना के पुराने हो चुके जगुआर लड़ाकू विमानों को तत्काल सेना के युद्धक विमान बेड़े से हटाकर आधुनिक विमानों की खरीद प्रक्रिया तेज की जाए, ताकि हमारे पायलटों को सुरक्षित और विश्वस्तरीय संसाधन उपलब्ध हों।
दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि बीते कुछ महीनों में लगातार भारतीय वायुसेना के जगुआर लड़ाकू विमानों की दुर्घटनाओं में हमारे जांबाज़ और कुशल वायुसेना के कई पायलटों को शहादत देनी पड़ी है, जो न केवल सशस्त्र बलों के लिए, बल्कि पूरे राष्ट्र के लिए एक अपूरणीय क्षति है। दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि ब्रिटेन, फ्रांस, ओमान और नाइजीरिया जैसे देशों ने भी जगुआर विमानों को बहुत पहले ही सेवा से हटा दिया है। परंतु भारत में अभी भी इन विमानों पर निर्भरता बनी हुई है, जो हमारे जवानों के जीवन और वायुसेना की संचालन क्षमतादोनों के लिए ख़तरा है। हाल में हुई इन दुर्घटनाओं को “दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं” कहकर अनदेखा नहीं किया जा सकता बल्कि ठोस निर्णय लेकर इन हादसों को दोबारा होने से रोकना होगा।

रक्षा मंत्रालय लगातार रक्षा बजट घटाता जा रहा है- दीपेंद्र हुड्डा

सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि रक्षा मंत्रालय लगातार रक्षा बजट घटाता जा रहा है। पिछले 11वर्षों में रक्षा बजट जीडीपी का 2.5प्रतिशत से घटाकर 1.9प्रतिशत पर आ गया है। जो 1962के बाद सबसे कम है। इसके चलते एयर फोर्स मार्डनाइजेशन के बजट में भी भारी कटौती हुई है। कैपिटल एक्सपेंडिचर, मार्डनाइजेशन बजट में गिरावट चिंताजनक है। आज भारत की वायुसेना में 180जहाजों की कमी है। हवाई जहाज इतने पुराने हो गये हैं कि लड़ाई में कम लेकिन हादसों में कहीं ज्यादा पायलट शहीद हो जाते हैं। आज देश को 60स्क्वाड्रन की जरुरत है। यूपीए सरकार के समय 41.1स्क्वाड्रन मंजूर हुए थे लेकिन आज सिर्फ 31स्क्वाड्रन मौजूद है। इसमें भी 21स्क्वाड्रन ऐसे हैं जिसमें जगुआर जैसे जहाज हैं। पिछले 6महीने में 3जगुआर विमान हादसे में हरियाणा के 2वायुसैनिक शहीद हो गये। दीपेन्द्र हुड्डा ने संसद में रक्षा बजट बढ़ाने, फौज को आधुनिक सैन्य संसाधनों, लड़ाकू विमानों से लैस करने की मांग की।

राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी गंभीर चिंता का विषय है- दीपेंद्र हुड्डा

उन्होंने याद दिलाया कि बीते 7 मार्च को, एक एंग्लो-फ़्रेंच SEPECAT जगुआर ग्राउंड अटैक फाइटर नियमित उड़ान के दौरान पंचकूला के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। 2 अप्रैल 2025 को गुजरात के जामनगर के पास जगुआर विमान दुर्घटना में रेवाड़ी निवासी 28 वर्षीय फ्लाइट लेफ्टिनेंट सिद्धार्थ यादव शहीद हो गए। इसके बाद 9 जुलाई 2025 को राजस्थान के चूरू ज़िले में एक और जगुआर क्रैश में रेवाड़ी के स्क्वाड्रन लीडर लोकेन्द्र सिंह सिंधु (31 वर्ष) और पाली, राजस्थान के फ्लाइट लेफ्टिनेंट ऋषिराज सिंह (23 वर्ष) की शहादत हुई। यह घटनाएं इस बात का स्पष्ट संकेत हैं कि वायुसेना के बेड़े में शामिल दशकों पुराने विमान अब सुरक्षा और तकनीकी दृष्टि से अत्यधिक जोखिमपूर्ण हो चुके हैं। दुर्घटनाओं की पिछली जाँच में भी इंजन की खराबी की और लड़ाकू विमानों की लंबी उम्र पर सवाल उठे थे। हमारे पायलट विश्व के सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षित सैनिकों में गिने जाते हैं, परंतु उन्हें अब भी 1970 के दशक में शामिल हुए पुराने विमानों से उड़ान भरनी पड़ रही है। भारतीय वायुसेना शायद दुनिया की एकमात्र वायु सेना है जो एंग्लो-फ़्रेंच ट्विन-इंजन जगुआर IS/IB/IM वेरिएंट के लगभग छह स्क्वाड्रनों का संचालन अब भी जारी रखे हुए है। यह अस्वीकार्य है और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी गंभीर चिंता का विषय है।

About Post Author

आपने शायद इसे नहीं पढ़ा

Subscribe to get news in your inbox