दिल्ली-NCR में प्रदूषण का कहर जारी, पराली नहीं, फिर यही है असली वजह

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April 17, 2026

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-लोकल ट्रैफिक बना बड़ी वजह: CSE रिपोर्ट -द्वारका सेक्टर-8: 55 दिन CO सीमा से ऊपर

नई दिल्ली/उमा सक्सेना/-     दिल्ली-एनसीआर की हवा इस बार भी जहरीली बनी हुई है, जबकि पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की घटनाएं कई सालों के मुकाबले सबसे कम दर्ज की गईं। इसके बावजूद अक्टूबर और नवंबर में दिल्ली का अधिकांश एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) बेहद खराब से गंभीर श्रेणी के बीच झूलता रहा। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) की नई रिपोर्ट इस प्रदूषण के पीछे “स्थानीय स्रोतों”—खासतौर पर ट्रैफिक—को मुख्य कारण बताती है।

ट्रैफिक से प्रदूषण का भार बढ़ा, पराली का योगदान लगभग शून्य
CSE रिपोर्ट के अनुसार, इस सीजन में पराली के धुएं का दिल्ली की हवा में योगदान अधिकांश दिनों में 5% से भी कम रहा। सिर्फ 12–13 नवंबर को यह अधिकतम 22% तक पहुंच पाया। इसके बावजूद हवा में कोई खास सुधार नहीं दिखा, जिससे साफ है कि दिल्ली का बड़ा प्रदूषण स्रोत इंटरनल है—यानी ट्रैफिक, निर्माण धूल, कचरा जलना और स्थानीय उत्सर्जन।

दिल्ली के 22 मॉनिटरिंग स्टेशनों पर CO की मात्रा खतरनाक स्तर पर
रिपोर्ट में बताया गया है कि दिल्ली के 22 प्रदूषण निगरानी स्टेशनों पर 59 में से आधे से ज्यादा दिन कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) तय सीमा से ऊपर पाई गई।

जहांगीरपुरी और DU नॉर्थ कैंपस: 50-50 दिन
जहांगीरपुरी इस साल दिल्ली का सबसे प्रदूषित हॉटस्पॉट बनकर सामने आया, जहां सालाना PM2.5 औसत 119 µg/m³ रिकॉर्ड हुआ। इसके बाद बवाना-वजीरपुर (113 µg/m³) और आनंद विहार (111 µg/m³) का स्थान रहा। विवेक विहार, नेहरू नगर, सिरी फोर्ट, अलीपुर और पटपड़गंज भी प्रमुख प्रदूषण हॉटस्पॉट के रूप में उभरे। पीक ट्रैफिक ऑवर में जहरीला धुआं दोगुना

रिपोर्ट में पाया गया कि सुबह 7–10 बजे और शाम 6–9 बजे के बीच PM2.5 और NO₂ दोनों की मात्रा एक साथ बढ़ जाती है—यह वह समय है जब सड़कों पर वाहनों का दबाव सबसे ज्यादा रहता है।

CSE रिसर्चर अनुमिता रॉयचौधरी कहती हैं—
“सर्दियों में हवा नीचे दब जाती है, ऐसे में वाहनों का धुआं वायुमंडल में फंस जाता है। यह रोजाना एक जहरीला मिश्रण तैयार कर रहा है।” प्रदूषण में सुधार रुका, सालाना PM2.5 फिर बढ़ा रिपोर्ट चेतावनी देती है कि 2018–2020 के बीच जो सुधार दिखा था, वह रुक चुका है।

2024 का सालाना PM2.5 औसत फिर बढ़कर 104.7 पहुंच गया, जो कि बेहद चिंताजनक है।
नवंबर में पूरे महीने AQI ‘बेहद खराब’ से ‘गंभीर’ श्रेणी में रहा, जो दर्शाता है कि समस्या पराली से कहीं बड़ा और लगातार बढ़ता शहरी उत्सर्जन है।

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