दिल्ली में मंचित होगा मार्मिक नाटक ‘संध्या छाया’  

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-बुजुर्गों की तन्हाई पर आधारित कहानी -12 अप्रैल को अक्षरा थिएटर में होगा विशेष मंचन

नई दिल्ली/उमा सक्सेना/-  राजधानी दिल्ली में रंगमंच प्रेमियों के लिए एक खास प्रस्तुति लेकर आ रहा है ‘4th Dimension’ समूह, जो प्रसिद्ध मराठी नाटककार जयवंत दलवी के चर्चित नाटक ‘संध्या छाया’ का मंचन करने जा रहा है। यह नाटक 12 अप्रैल 2026, रविवार को शाम 6:30 बजे बाबा खड़क सिंह मार्ग स्थित अक्षरा थिएटर में प्रस्तुत किया जाएगा। आयोजकों ने दर्शकों से इस संवेदनशील और विचारोत्तेजक नाटक को देखने के लिए आमंत्रित किया है।

निर्देशन और कलाकारों की दमदार टीम
इस नाटक का निर्देशन प्रवीण कुमार और रिंकी नेगी द्वारा किया गया है, जबकि हिंदी अनुवाद कुसुम कुमार ने किया है। मंच पर रिंकी नेगी (नानी), हनी वशिष्ठ (नाना), हिमांशु (दीनू), संजीव/हिमांशु (विनय), रिया (शर्मिला) और संजीव भभोटे (म्हाडू) जैसे कलाकार अपनी शानदार अदाकारी से कहानी को जीवंत करेंगे।

बुजुर्ग दंपत्ति की तन्हाई की मार्मिक कहानी
‘संध्या छाया’ एक यथार्थवादी नाटक है, जो एक बुजुर्ग दंपत्ति के जीवन की कहानी को दर्शाता है। यह दंपत्ति अपने दो बेटों के होते हुए भी अकेलेपन से जूझ रहा है। बड़ा बेटा अमेरिका में बस चुका है और छोटा बेटा एयरफोर्स में है। समय के साथ दोनों बेटे अपने जीवन में व्यस्त हो जाते हैं और माता-पिता अकेले रह जाते हैं। उनका जीवन छोटी-छोटी खुशियों और किसी के आने-जाने की उम्मीदों में बीतता है।

भावनात्मक घटनाएं और सामाजिक संदेश
नाटक का एक बेहद भावुक पहलू तब सामने आता है जब नाना एक छोटी बच्ची से फोन पर बात करते हुए खुद को उसका दादा बताता है, सिर्फ इसलिए ताकि उसे किसी अपने की आवाज सुनने को मिल सके। कहानी में आगे चलकर छोटे बेटे की मृत्यु और बड़े बेटे का विदेश में ही बस जाने का फैसला इस दंपत्ति को भीतर से तोड़ देता है। यह नाटक आधुनिक समाज पर एक गहरा सवाल उठाता है कि तरक्की और सफलता की दौड़ में हम अपने बुजुर्गों को कितना पीछे छोड़ रहे हैं।

समाज को आईना दिखाता नाटक
‘संध्या छाया’ सिर्फ एक नाटक नहीं, बल्कि समाज की सच्चाई को दर्शाने वाला एक आईना है। यह हमें सोचने पर मजबूर करता है कि रिश्तों की अहमियत क्या है और बुजुर्गों की देखभाल हमारी जिम्मेदारी क्यों है। यह प्रस्तुति दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ने के साथ-साथ एक मजबूत संदेश भी देती है।

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