नई दिल्ली/उमा सक्सेना/- दिल्ली-एनसीआर में इन दिनों वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है। कई इलाकों में एयर क्वॉलिटी इंडेक्स (AQI) लगातार 300–400 के बीच बना हुआ है। ऐसे माहौल में प्रदूषित हवा न सिर्फ फेफड़ों को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि रोजमर्रा की कुछ गलत आदतें हमारे खून में जहर घोलने का काम भी कर रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, हवा में मौजूद PM2.5 जैसे अति सूक्ष्म कण श्वसन तंत्र से गुजरकर सीधे ब्लड फ्लो तक पहुंच जाते हैं और हृदय रोग तथा स्ट्रोक का खतरा कई गुना बढ़ा देते हैं।
PM2.5 कण कैसे पहुंचते हैं खून तक?
वायुमंडल में मौजूद बेहद छोटे कण फेफड़ों की परत को नुकसान पहुंचाते हैं। ये कण खून में पहुंचकर सूजन पैदा करते हैं, रक्त वाहिकाओं को संकीर्ण कर देते हैं और हार्ट अटैक व स्ट्रोक की आशंका बढ़ा देते हैं। ऐसे में AQI बढ़ने पर कुछ आदतें इस खतरे को और ज्यादा तेज कर देती हैं।
1. हाई AQI में मॉर्निंग वॉक करना
जब AQI 300 से ऊपर हो, तब बाहर मॉर्निंग वॉक या तेज व्यायाम करना खतरनाक साबित हो सकता है। व्यायाम के दौरान सांस लेने की रफ्तार बढ़ जाती है, जिससे PM2.5 कण ज्यादा मात्रा में फेफड़ों तक पहुंचते हैं। ये कण तेजी से खून में घुलकर दिल पर अनावश्यक दबाव डालते हैं और फेफड़ों में सूजन पैदा कर सकते हैं।
2. घर के अंदर धूम्रपान करना
कई लोग मानते हैं कि वे बाहर की प्रदूषित हवा से सुरक्षित हैं, लेकिन अगर वे घर में धूम्रपान करते हैं, तो घर के अंदर का प्रदूषण कई गुना बढ़ जाता है। सिगरेट का धुआं PM2.5 और जहरीले रसायनों का बड़ा स्रोत है। बंद कमरों में धुआं आसानी से बाहर नहीं निकलता और खून में पहुंचकर रक्त वाहिकाओं पर असर डालता है।
3. बिना मास्क बाहर निकलना
उच्च प्रदूषण स्तर में मास्क न पहनना भी खतरनाक है। N95 या N99 मास्क PM2.5 कणों को रोकने में सक्षम हैं। बिना मास्क के बाहर निकलने पर ये कण नाक के प्राकृतिक फिल्टर को पार कर सीधे फेफड़ों और फिर खून तक पहुंच जाते हैं, जिससे हृदय संबंधी बीमारियों का जोखिम बढ़ जाता है।
4. घर के अंदर प्रदूषण बढ़ाने वाली चीजें जलाना
धूपबत्ती, मच्छर भगाने वाली कॉइल, लकड़ी या कोयला जलाना भी इनडोर प्रदूषण का बड़ा कारण है। इससे निकलने वाला धुआं PM2.5 और कार्बन मोनोऑक्साइड बनाता है। बंद जगह में ये धुआं फंसा रहता है और खून में प्रवेश कर हृदय व श्वसन तंत्र पर बुरा असर डालता है।
जानकारी और सावधानी ही बचाव का रास्ता
विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदूषण के बढ़ते स्तर में अपनी आदतों को बदलना बेहद जरूरी है। AQI अधिक होने पर बाहर कम जाएं, मास्क पहनें, घर के अंदर धुआं पैदा करने वाली चीजें न जलाएं और व्यायाम घर के भीतर सुरक्षित वातावरण में करें।


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