पाकिस्तानी हैंडलर कर रहे थे दिल्ली को दहलाने की तैयारी

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October 19, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

नई दिल्ली/उमा सक्सेना/-     जांच एजेंसियों की ताज़ा कार्रवाई में बड़ा खुलासा हुआ है। पाकिस्तान में बैठे आतंकी हैंडलर दिल्ली के नज़दीक स्थित अल फलाह यूनिवर्सिटी को अपने नेटवर्क का केंद्र बनाकर राजधानी और आसपास के इलाकों में हमलों की साजिश रच रहे थे। इन्हीं हैंडलरों के निर्देश पर विश्वविद्यालय के कुछ डॉक्टरों व स्टाफ को कट्टरपंथी नारों के ज़रिये प्रभावित किया जा रहा था।

कट्टरपंथी नारे बन रहे थे ब्रेनवॉश का हथियार
“कश्मीर बनेगा दारुल इस्लाम” और “शरीयत या शहादत” जैसे नारे, जो आतंकी संगठन अंसर गजावत-उल-हिंद के बताए जा रहे हैं, इन्हीं का उपयोग कर डॉक्टरों, स्टाफ और छात्रों में कट्टर सोच भरी जा रही थी। एजेंसी सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तानी हैंडलर ये नारे डॉ. मुज्जमिल, डॉ. उमर और उनके साथियों तक पहुंचाते थे, जिसके बाद ये डॉक्टर इन्हें आगे फैलाते थे।

कश्मीर का हवाला देकर बढ़ाई गई पैठ
जांच में सामने आया कि आतंकियों ने इन डॉक्टरों को इसलिए निशाना बनाया क्योंकि वे कश्मीर मूल के थे। पहले डॉ. शाहीन, फिर डॉ. मुज्जमिल और उसके बाद डॉ. उमर से लगातार संपर्क साधा गया। इनमें डॉ. मुज्जमिल मुख्य कड़ी बन गया था। उसी तक पैसे भेजे जाते थे और विस्फोटक सामग्री खरीदने व छुपाने की जिम्मेदारी भी उसी पर थी। उसने दो अलग-अलग ठिकानों पर विस्फोटक छिपाकर रखे थे।

डॉ. उमर को ‘शरीयत या शहादत’ नारे से उकसाया
30 अक्टूबर को डॉ. मुज्जमिल की गिरफ्तारी के बाद पाकिस्तानी हैंडलर ने सीधे डॉ. उमर से संपर्क शुरू कर दिया। उसने मोबाइल बंद कर दिया था और सोशल मीडिया के ज़रिये लगातार हैंडलर से जुड़ा रहा। करीब 10 दिनों तक उसे कट्टर नारे सुनाकर उग्र बनाया गया। एजेंसी सूत्रों के अनुसार, रोज़ कई बार वीडियो कॉल पर बातचीत होती थी।

10 नवंबर को लाल किले के पास हुआ धमाका
ब्रेनवॉश की हद यहां तक पहुंच गई कि 10 नवंबर को डॉ. उमर दिल्ली के लाल किले के पास गया और बम विस्फोट कर दिया। इस घटना में उसकी जान भी चली गई। जांच एजेंसी अब इस पूरी साजिश की गहराई से जांच में जुटी है और पाकिस्तानी नेटवर्क की कड़ियों को खंगाल रही है।

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