तालाब की भूमि पर डीटीसी ने बनाया बस टर्मिनल

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August 24, 2026

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तालाब की भूमि पर डीटीसी ने बनाया बस टर्मिनल

-रिपोर्ट में कहा- एस टर्मिनल के साथ ही बहुमंजिला व्यावसायिक इमारत का निर्माण कराया गया -डीटीसी-एमसीडी ने नहीं वखित किया जवाब, जवाब दाखिल करने का मिला आखिरी मौका

नई दिल्ली/-  नई दिल्ली सामान्य तौर पर सरकारी एजेंसी से उम्मीद की जाती है कि अतिक्रमणकारियों से जल निकाय, यमुना बाढ़ व जंगल को अतिक्रमण करने से बचाएं, लेकिन मौजूदा मामले में दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) ने ही तालाब की 30.5 बीधा भूमि पर अतिक्रमण कर बस टर्मिनल का निर्माण कर लिगा। अतिक्रमण के खिलाफ नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में दाखिल एक आवेदन पर इस तथ्य की पु उत्तर-पश्चिम जिलाधिकारी में स्वयं की है। एनजीटी के समक्ष दाखिल हलफनामा में कहा गया है कि नजफगढ़ गांव में तालाब के रूप में दर्ज 30.5 बीघा जमीन पर डीटीसी ने एक बस टर्मिनल व बहुमंजिला व्यावसायिक इमारत का निर्माण कर लिया। एनजीटी में दाखिल हलफनामा में जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि संबंधित भूमि एक तालाब (जाल निकाय) को है और यहां पर वर्तमान में जाति निकाय पर अतिक्रमण कर डीटीसी द्वारा टर्मिनल का इस पर निर्माण किया गया है।

एनजीटी चेयरमैन न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव, न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल व पर्यावरण विशेषज्ञ डा. ए सेंथिल चेल की पीठ ने रिकॉर्ड पर लिया कि पूर्व के आदेश के बावजूद भी मामले में डीटीसी व एमसीडी द्वारा जवाब नहीं दाखिल किया गया। अदालत ने डीटीसी व एमसीडी को दो सप्ताह के अंदर जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए सुनवाई 20 अगस्त तक के लिए स्थगित कर दी। साथ ही डीटीसी को अगले आदेश तक उक्त जगाह पर कई और निर्माण कार्य न करने का निर्देश दिया गया। एनजीटी आवेदनकर्ता करतार सिंह सहित अन्य की तरफ से दायर आवेदन पर विचार कर खा है। आरोप है कि तालाब की भूमि पर अतिक्रमण कर सरकारी एजेंसी ने बस टर्मिनल और बहुमंजिला पिक इमारत का निर्माण किया है।

भू- उपयोग में परिवर्तन का नहीं है कोई रिकार्ड
रिपोर्ट में यह भी कहा कि डीटीसी द्वारा की गई निर्माण गतिविधि के लिए वन विभाग से भू-उपयोग में परिवर्तन। सीएलयू के संबंध में कोई भी औपचारिक एनओसी का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। संबंधित भूमि वेटलैइस। संरक्षण और प्रबंधन) नियम-2017 के अनुसार पहचान की गई-वेटलैंड्स के दाने में आती है और यह ग्राम सभा की जमीन है। ऐसी भूमि पर निर्माण, उत्तर या पैड़ी की कटाई जैसी किसी भी गतिविधि के लिए उसके आदमी के नियम-वार का अनुपालन करना आवश्यक है। वहीं, डीडीए ने अपने जवाब में कहा कि जल निकाय 31 मई 2016 को तत्तावतीन दक्षिण दिल्ली नगर निगम अब एमसीडी को सौंप दिया गया था। इनका सा-सात अब मसीडी की ही जिम्मेदारी है।

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