
बिहार/उमा सक्सेना/- भोजपुर जिले की जुझारू छात्र नेता खुशबू पाठक ने अब राजनीतिक पारी की शुरुआत करने का ऐलान किया है। वे बड़हरा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ेंगी। छात्रों और युवाओं के अधिकारों की आवाज उठाने वाली खुशबू अब जनप्रतिनिधि के रूप में जनता की बात विधानसभा तक पहुंचाने का लक्ष्य रखती हैं।
संघर्ष से बनी पहचान
70वीं बीपीएससी शिक्षक भर्ती घोटाले के विरोध में खुशबू पाठक ने अहम भूमिका निभाई थी। इस आंदोलन के दौरान उन्हें नौ दिन तक बेऊर जेल में रहना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। लगातार विरोध प्रदर्शनों और धरनों के ज़रिए उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में सुधार और पारदर्शिता की मांग उठाई। इसी संघर्ष ने उन्हें छात्रों के बीच मजबूत पहचान दिलाई।
युवाओं और महिलाओं की आवाज बनने का संकल्प
खुशबू का कहना है कि उनका उद्देश्य सिर्फ राजनीति में आना नहीं, बल्कि युवाओं, छात्रों और महिलाओं की आवाज बनना है। वे चाहती हैं कि बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और प्रतियोगी परीक्षाओं की अव्यवस्था जैसे मुद्दों को विधानसभा में प्रभावी ढंग से उठाया जाए।
शिक्षा और रोजगार होगा प्राथमिक मुद्दा
उनका चुनावी एजेंडा शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी बनाना, प्रतियोगी परीक्षाओं को समय पर कराना और अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा करना है। वे चाहती हैं कि भर्ती परीक्षाओं में कटऑफ मार्क्स और मूल्यांकन प्रक्रिया को सार्वजनिक किया जाए, ताकि युवाओं का भरोसा सिस्टम पर कायम रह सके।
राजनीति में युवाओं की भागीदारी जरूरी
खुशबू का मानना है कि बदलाव की शुरुआत सड़कों से नहीं, व्यवस्था के अंदर से होनी चाहिए। इसलिए युवाओं को सिर्फ आंदोलन नहीं, बल्कि राजनीति में भी अपनी भागीदारी बढ़ानी चाहिए। यही सोच उन्हें संघर्ष के रास्ते से चुनावी मैदान तक लेकर आई है।
समाज सेवा को मानती हैं उद्देश्य
बड़हरा प्रखंड के पीपरपांती गांव से आने वाली खुशबू पाठक राजनीति को सेवा का माध्यम मानती हैं। वे कहती हैं कि यह लड़ाई सिर्फ एक सीट की नहीं, बल्कि हर उस छात्र और बेरोजगार युवा की है जो अपने हक के लिए आवाज उठाना चाहता है।





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