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चंद्रग्रहण + पूर्णिमा व्रत: क्या दोनों साथ रख सकते हैं?

धर्म/सिमरन मोरया/-  भाद्रपद पूर्णिमा का व्रत 7 सितंबर को रखा जाएगा। इस दिन साल का अंतिम चंद्रग्रहण भी है। ग्रहण लगने से 9 घंटे पहले सूतक काल आरंभ हो जाएगा। वहीं,7 सितंबर से सूर्योदय के साथ ही पूर्णिमा तिथि का आरंभ हो रहा है। ऐसे में पूर्णिमा व्रत करने वालों को इस बार कुछ विशेष नियमों का पालन करना होगा। तो आइए जानते हैं चंद्रग्रहण के दौरान व्रत करना शुभ है या नहीं साथ ही जानें पूर्णिमा व्रत का क्या विशेष नियम रहेंगे।

पूर्णिमा का व्रत कब करना सही रहेगा
पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि 7 तारीख को सूर्योदय के साथ ही रात में 11 बजकर 39 मिनट तक पूर्णिमा तिथि रहेगी। ऐसे में पूर्णिमा का व्रत 7 सितंबर रविवार के दिन ही रखना शास्त्र सम्मत है। वहीं, 7 तारीख में रात में 9 बजकर 57 मिनट पर ग्रहण का आरंभ हो जाएगा और 9 घंटे पहले यानी 1 बजकर 57 मिनट से सूतक लग जाएगा।

ऐसे में पूर्णिमा का व्रत 7 तारीख में रखें और दोपहर में 1 बजकर 57 मिनट से पहले ही अपनी पूजा कर लें। इसके बाद सूतक काल आरंभ होने के बाद मूर्तियों का स्पर्श न करें न ही पूजा पाठ इस दौरान किया जाता है। इसके बाद शाम में ग्रहण आरंभ होने से पहले ही चंद्रमा को अर्घ दे सकते हैं क्योंकि, सूतक काल में देवी देवताओं को स्पर्श को मना किया जाता है लेकिन, आप अर्घ देकर अपना व्रत का पारण कर सकते हैं। ग्रहण लगने के बाद कुछ भी खाए पिए नहीं। आप चाहें तो मन ही मन अपने देवताओं का स्मरण करते रहें।

चंद्रग्रहण के साथ पूर्णिमा व्रत, जानें नियम
1)
इस दिन सुबह जल्दी उठकर व्रत का संकल्प लें। इसके बाद दोपहर में 2 बजे से पहले ही अपनी पूजा कर लें।
2) पूजा के लिए एक लकड़ी की चौकी पर पीला वस्त्र बिछाएं इसके बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें।
3) इसके बाद शंख लेकर पंचामृत से भगवान विष्णु का अभिषेक करें।
4) भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को वस्त्र अर्पित करें और पुष्प, अक्षत, पान, सुपारी अर्पित करें।
5) इसके बाद घी का दीपक जलाकर पूर्णिमा व्रत कथा का पाठ करें।
6) अंत में लक्ष्मी नारायण की आरती करके सभी को प्रसाद वितरित कर दें।

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