‘खामोश करवाया गया हूं, हारा नहीं हूं’—राघव चड्ढा का बड़ा बयान

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May 15, 2026

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-AAP में मचा सियासी घमासान -उपनेता पद से हटाए जाने पर सियासी हलचल

नई दिल्ली/उमा सक्सेना/-   राजनीतिक गलियारों में उस वक्त हलचल तेज हो गई जब राघव चड्ढा को राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के उपनेता पद से हटाने का फैसला लिया गया। पार्टी ने उनकी जगह अशोक मित्तल को नया उपनेता नियुक्त किया और साथ ही यह भी संकेत दिया कि चड्ढा को सदन में बोलने के लिए समय न दिया जाए। इस फैसले के बाद राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है।

‘मेरी खामोशी को कमजोरी न समझें’—चड्ढा की प्रतिक्रिया
इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया पर भावुक और तीखा संदेश साझा किया। उन्होंने कहा कि उन्हें चुप कराया गया है, लेकिन वह पराजित नहीं हुए हैं। चड्ढा ने सवाल उठाया कि जब भी उन्हें सदन में बोलने का अवसर मिला, उन्होंने हमेशा आम जनता से जुड़े मुद्दे ही उठाए—फिर उनके बोलने से परेशानी क्यों हो रही है? उन्होंने अपने संदेश में यह भी कहा कि उनकी आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन समय आने पर वह और मजबूती से सामने आएंगे।

पार्टी के फैसले से उठे कई सवाल
आम आदमी पार्टी के इस निर्णय ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर जहां पार्टी नेतृत्व ने संसदीय जिम्मेदारियों में बदलाव का तर्क दिया है, वहीं दूसरी ओर इस कदम को अंदरूनी मतभेदों से जोड़कर देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी सांसद को बोलने से रोकने का अनुरोध असामान्य है और यह पार्टी के भीतर किसी बड़े बदलाव या तनाव की ओर इशारा करता है।

भाजपा का हमला, केजरीवाल पर निशाना
इस पूरे विवाद पर भारतीय जनता पार्टी, ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने इसे आम आदमी पार्टी के अंदरूनी संकट का संकेत बताया। उन्होंने वीरेंद्र सचदेवा पर निशाना साधते हुए कहा कि यह फैसला नेतृत्व की कमजोरी को दर्शाता है। उनके मुताबिक, पार्टी के बड़े नेताओं का इस तरह हटाया जाना यह दिखाता है कि संगठन के भीतर असंतोष बढ़ रहा है।

सियासी समीकरणों पर असर
इस घटनाक्रम ने दिल्ली की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। पहले भी कुछ नेताओं के पार्टी से दूरी बनाने की खबरें सामने आती रही हैं, और अब राघव चड्ढा को लेकर उठे विवाद ने इस चर्चा को और तेज कर दिया है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि यह मामला पार्टी के अंदरूनी समीकरणों और राष्ट्रीय राजनीति पर किस तरह असर डालता है।

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