केविके उजवा में धान की पराली प्रबंधन पर किया गया खण्ड-स्तरीय कृषक जागरूकता कार्यक्रम

स्वामी,मुद्रक एवं प्रमुख संपादक

शिव कुमार यादव

वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी

संपादक

भावना शर्मा

पत्रकार एवं समाजसेवी

प्रबन्धक

Birendra Kumar

बिरेन्द्र कुमार

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आईटी प्रबंधक

Categories

June 2026
M T W T F S S
1234567
891011121314
15161718192021
22232425262728
2930  
June 5, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

केविके उजवा में धान की पराली प्रबंधन पर किया गया खण्ड-स्तरीय कृषक जागरूकता कार्यक्रम

-सागरपुर गांव में किसानों के बीच फसल अवशेष का यथा-स्थान प्रबंधन

नजफगढ़/नई दिल्ली/- शुक्रवार को कृषि विज्ञानं केंद्र (राष्ट्रीय बागवानी अनुसन्धान विकास प्रतिष्ठान), उजवा नई दिल्ली के द्वारा भारत सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना “फसल अवशेष का यथा-स्थान प्रबंधन” के अंतर्गत खण्ड-स्तरीय कृषक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन सांरगपुर गांव (नफजगढ़ ब्लॉक) में किया गया। इस कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य पराली प्रबंधन करने वाली मशीनों के बारे में तकनीकी ज्ञान के बारे में अवगत करना। जिससे किसान नई मशीनों का प्रयोग करके पराली प्रबंधन कर सके।

डॉ डी के राणा, विशेषज्ञ (पादप सुरक्षा) इस जागरूकता कार्यक्रम की शुरुआत में उपस्थित किसानों का स्वागत किया एवं परियोजना के बारे में अवगत करवाया। डॉ राणा ने किसानो को धान की कटाई के उपरांत पराली प्रबंधन के लिए बायो डिकम्पोजर का घोल बनाने की विधि एवं छिड़काव के बारे में अवगत करवाते हुआ मृदा में जीवांश प्रदार्थ की बढ़ोत्तरी की उपयोगिता के बारे में अवगत करवाते हुए जानकारी उपलब्ध करवायी। इस कार्यक्रम में श्री कैलाश, विशेषज्ञ (कृषि प्रसार) ने किसानो से धान की कटाई करते समय कम्बाइन के साथ सुपर स्ट्रा मैनेजमेंन्ट सिस्टम लगा होने के बार में जानकारी दी एवं किसानां से धान की कटाई सुपर स्ट्रा मैनेजमेंन्ट सिस्टम में लगे कम्बाइन से ही करवाने की अपील की एवं किसानो को धान की कटाई के बाद हैप्पी सीडर, सुपर सीडर एवं जीरो सीड ड्रिल मशीन से गेंह की सीधी बुवाई की तकनीकी के बारे में जानकारी उपलब्ध करवाई एवं किसानो को पराली प्रबंधन में काम आने वाली अन्य मशीनों जैसे मल्चर, रोटावेटर, सर्बमास्टर, बेलर आदि के बारे में तकनीकी एवं संचालन की विस्तृत जानकारी उपलब्ध करवायी। इसी दौरान श्री राकेश कुमार, विशेषज्ञ (बागवानी) ने किसानो को धान की पराली जलाने से मृदा एवं वातावरण में होने वाले नुकसान के बारे में जानकारी दीं। उन्होंने बताया कि पराली जलाने से वायु प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन एवं मिटटी के पोषक तत्व जैसे नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटशियम, सल्फर एवं कार्बनिक पदार्थ एवं साथ ही लाभदायक जीव जैसे वर्मी केचुआ आदि खत्म होने के बारे में अवगत करवाया। डॉ. जय प्रकाश, विशेषज्ञ (पशु विज्ञान) ने किसानों को धान की पराली, पशुओं के चारे के रुप उपयोग करने के बारे में जागरुक किया ताकि नई पराली चारे के रुप पशुओं को नुकसान ना पहुंचाये एवं उन्होनें वर्तमान चल रही ढेलेदार त्वचा रोग (लम्पी स्कीन डिसीज) गौवंशीय में होने वाला विषाणुजनित संक्रामक रोग के परम्परागत उपचार, रखरखाव एव सावधानियाँ के बारे में विस्तृत जानकारी उपलब्ध करवाई।

इस जागरूकता कार्यक्रम के दौरान किसानो को विभिन्न पत्रिका जैसे फसल अवशेष जलाने के नुकसान, फसल अवशेषों का मशीनों द्वारा प्रबंधन एवं जीरो सीड ड्रिल मशीन तकनीकी से गेंहू की सीधी बुवाई का वितरण किया एवं जानकारी उपलब्ध करवाई। इस कार्यक्रम में प्रगतिशील 60
किसानो ने भाग लिया एवं इस संदेश को अधिक से अधिक जनसमुदाय के पास पहुंचने का प्रण लिया।

About Post Author

Subscribe to get news in your inbox