केजरीवाल की नई शराब नीति शराब कारोबारियों को फायदा, सरकार को नुकसान!

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May 15, 2026

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केजरीवाल की नई शराब नीति शराब कारोबारियों को फायदा, सरकार को नुकसान!

-नई शराब नीति में शराब कारोबारियों का मुनाफा 1 हजार प्रतिशत बढ़ा, जांच रिपोर्ट में हुआ खुलासा -सवाल आखिर कारोबारियों पर इतनी मेहरबान क्यों हुई केजरीवाल सरकार

नई दिल्ली/- दिल्ली की नई शराब नीति को देश की सबसे बेहतरीन शराब नीति का दावा करने वाली दिल्ली सरकार की नीति पर जांच एजेंसियों ने अपनी रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे किये हैं। दिल्ली सरकार की पुरानी शराब नीति की तुलना में 2021-22 में मनीष सिसोदिया द्वारा लाई गई नई नीति के तहत शराब विक्रेताओं को रिटेल मार्जिन में 989 प्रतिशत का इजाफा हुआ। शराब घोटाले में दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के खिलाफ जांच एजेंसियों द्वारा की गई जांच में सामने आया है कि नई आबकारी नीति लाए जाने के बाद शराब कारोबारी लगभग हजार प्रतिशत का मुनाफा कमा रहे थे।
दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल भले ही डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया को लगातार ’कट्टर इमानदार’ बता रहे हैं, लेकिन उनकी चर्चित शराब पॉलिसी विवादों के घेरे में है। आरोप है कि दिल्ली सरकार की शराब नीति को जानबूझकर इस तरह से बनाया गया, ताकि शराब कारोबारियों को फायदा पहुंच सके और वे ज्यादा लाभ कमा सकें। अब इसमें मनीष सिसोदिया की क्या हिस्सेदारी है और क्या जानबूझकर कारोबारियों को फायदा पंहुचाया जा रहा है या कोई और कारण भी है। जांच एजेंसियां इसका पता लगाने की कोशिश कर रही हैं।  

कुछ ऐसे दस्तावेज मीडिया को मिले है जिनके मुताबिक, पुरानी नीति के तहत शराब कारोबारी जितना कमाते थे, नई नीति में उससे लगभग 10 गुना अधिक मार्जिन ले रहे थे। दस्तावेजों के मुताबिक, कारोबारी आरके ब्रांड की शराब की 750 उस बोतल में पुरानी नीति के तहत 33.35 रुपए का लाभ कमा रहे थे। वहीं, नई नीति के तहत इसी बोतल पर कारोबारियों को 363.27  रुपए का लाभ हो रहा था। यानी हर बोतल पर 330 रुपए ज्यादा। वहीं, नई नीति के तहत ग्राहक के लिए शराब की बोतल की कीमत 530 रुपए से बढ़कर 560 रुपए हो गई।
               इतना ही नहीं नई नीति के चलते सरकार के खाते में जाने वाली एक्साइज ड्यूटी को भारी नुकसान हुआ है। पुरानी नीति के तहत सरकार को 530 रुपए की एक बोतल पर 223.89 रुपए मिलते थे। वहीं, नई नीति के तहत एक्साइज ड्यूटी होलसेल प्राइज का सिर्फ 1 फीसदी कर दी गई. यानी ग्राहकों को 560 रुपए में मिलने वाली बोलत पर सरकार को सिर्फ 1.88 पैसा एक्साइज ड्यूटी मिली।
              जांच एजेंसियों को संदेह है कि नई आबकारी नीति से शराब लॉबी को भारी मात्रा में लाभ हो रहा था। इसके बदले आप के नेताओं को मौद्रिक लाभ मिल रहा था। शराब लॉबी मनीष सिसोदिया के सहयोगियों को इतनी बड़ी रकम कमाने के लिए रिश्वत के तौर पर पैसे दे रही थी। सीबीआई और ईडी ने इस दिशा में भी जांच शुरू कर दी है। सीबीआई ने अपनी एफआईआर में दावा किया है कि मनीष सिसोदिया के सहयोगियों को शराब विक्रेता द्वारा दो बार बैंक अकाउंट में एक करोड़ रुपये और नकद में 4 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। वहीं, बीजेपी का आरोप है कि यह हजारों करोड़ का घोटाला है। वहीं, मनीष सिसोदिया ने इस मामले में सीबीआई की रेड के बाद दावा किया है कि उनकी शराब नीति देश में सबसे बेहतर है।

दिल्ली का शराब-घोटाला
पुरानी शराब नीति-

750एमएल थोक कीमत 166.73 रूपये
एक्साइज ड्यूटी-      223.88 रूपये
वैट-                106.00 रूपये
रिटेलर कमीशन-       33.39 रूपये
एमआरपी             530.00 रूपये

नई शराब नीति लागू मार्च 2022-
750एमएल थोक कीमत 188.41 रूपये
एक्साइज ड्यूटी-        1.88 रूपये
वैट-                   1.90 रूपये
रिटेलर कमीशन-       363.27 रूपये
एमआरपी              560.00 रूपये
               इस प्रकार पुरानी शराब नीति में एक बोतल पर सरकार की कमाई 329.89 और नई शराब नीति में मात्र 8.32 रूपये होती है। यानी नई नीति से प्रति बोतल 321.57 रूपये का सरकार को घाटा। पुरानी नीति में रिटेलर का कमीशन 33.39 जबकि नई नीति में रिटेलर का कमीशन 363.27 होता अर्थात प्रति बोतल 330.12 रूपये का रिटेलर को फायदा।
               यहां पर देखने से यह स्पष्ट होता है कि प्रति बोतल सरकार को जितना नुकसान होता है, लगभग उतना ही बल्कि उससे भी थोड़ा ज्यादा रिटेलर को फायदा पंहुचा है। अब कोई भी समझ सकता है कि चतुराई से नई नीति बनाकर मैन्युफैक्चरर्स/रिटेलर्स को फायदा पंहुचाया गया। अब ये फायदा मैन्युफैक्चरर्स को कैसे पंहुचे, तो नई नीति में मैन्युफैक्चरर्स को रिटेल में भी शॉप खोलने की अनुमति दे दी।

अब बिक्री के आंकड़े भी देख लीजिए
पुरानी नीति में जहां शराब की बिक्री प्रतिमाह 132 लाख लीटर थी, तो नई शराब नीति में प्रतिमाह शराब की बिक्री 245 लाख लीटर हो गई। इस बिक्री को बढ़ाने के लिए बाकायदा पीने वाले की उम्र घटाकर 18 साल और समय बढाकर रात्रि 3 बजे तक कर दिया।
              अब आप समझ गए होंगे कि ये कितना बड़ा घोटाला है और कितनी बड़ी कमाई केज़रीवाल एन्ड कम्पनी ने की है। जिसकी वजह से चीफ सेक्रेटरी को एलजी से सीबीआई जांच के लिए कहना पड़ा। ये हाल उस पार्टी का है जो राजनीति से भ्रष्टाचार मिटाने का दावा करके प्रचंड बहुमत से सत्ता में आई थी। परन्तु उसकी दाढ़ी तो तिनकों से भरी निकल रही है।

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