कृषि कर्ज माफी किसानों की समस्या का हल नही

स्वामी,मुद्रक एवं प्रमुख संपादक

शिव कुमार यादव

वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी

संपादक

भावना शर्मा

पत्रकार एवं समाजसेवी

प्रबन्धक

Birendra Kumar

बिरेन्द्र कुमार

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आईटी प्रबंधक

Categories

May 2026
M T W T F S S
 123
45678910
11121314151617
18192021222324
25262728293031
May 18, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

कृषि कर्ज माफी किसानों की समस्या का हल नही

-राज्यों के खर्च व किसान ऋणों पर पड़ रहा विपरीत असर, नाबार्ड ने कराया शोध
नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/- देश में किसानों की आर्थिक दशा को सुधारनें के लिए उनकी आय दोगुनी करने के प्रयास लगातार जारी है। हालांकि अभी किसानों की कर्ज माफी एक बड़ा मुद्दा बना हुआ लेकिन एक शोध में सामने आया है कि कृषि कर्ज माफी किसानों की समस्या का हल नही है बल्कि इससे आगे बढ़कर किसानों के लिए कुछ पुख्ता उपाय करने होंगे ताकि किसान कृषि में अपने आपकों सुरक्षित समझ सके। हालांकि पिछल ेकाफी समय से कृषि कर्ज माफी एक बड़ा चुनावी, मुद्दा बना चुका है जिसे राजनीतिक पार्टियां चुनावों के समय वोट की राजनीति के रूप में भुनाती रही हैं। लेकिन लगातार इसके समर्थन व विरोध में स्वर उठते रहे हैं। अब एक अध्ययन में पाया गया है कि  यह किसानों की समस्याओं के खात्मे का कोई रामबाण हल नहीं है।
                    नाबार्ड द्वारा जारी इस अध्ययन रिपोर्ट में कहा गया है कि कर्ज माफी से इसे लागू करने वाले राज्यों के खर्च की गुणवत्ता पर आंच आई है और कृषि कर्ज देने में वित्त संस्थाओं के प्रोत्साहन पर भी असर आया है। इस शोध रिपोर्ट को नाबार्ड के चेयरमैन ने शुक्रवार को जारी किया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कर्जमाफी का सांख्यिकी दृष्टि से मूल्यवृद्धिकारी कोई फर्क नहीं पड़ा है।
                  कर्ज माफी के आंकड़ों के आधार पर किए गए अध्ययन में पंजाब, उत्तर प्रदेश व महाराष्ट्र के करीब 3000 किसानों को शामिल किया गया था। इसमें यह देखा गया कि राज्यों ने कृषि कर्ज माफी के लिए पैसों का इंतजाम कैसे किया? क्या दूसरे कोष की राशि की हेराफेरी की गई? यदि अन्य फंड का इस्तेमाल किया तो उसका पूंजीगत खर्चों (ब्ंचम्Û) पर क्या असर पड़ा? कर्ज माफी के बाद किसानों के व्यवहार में क्या बदलाव आया? इन सवालों के आधार पर प्राथमिक सर्वे के माध्यम से अध्ययन किया गया।
               अध्ययन रिपोर्ट में कहा गया है कि संकटग्रस्त किसानों की स्थायी तरीके से मदद की रणनीति पर नए सिरे से विचार की जरूरत है, ताकि वे अल्प व दीर्घावधि जरूरतों से निपटने में सशक्त बन सकें। यह रिपोर्ट उन ढांचागत घटकों पर गहराई से विचार पर जोर देती है, जिनके कारण किसान संकट में आते हैं।
                  रिपोर्ट में कहा गया है कि कर्जमाफी को किसानों के संकट का एकमुश्त समाधान माना जाता है, जबकि कृषक कई परेशानियों से ग्रस्त हैं, जिनके कारण देश में खेती का कारोबार अव्यवहारिक बन गया है। फसल उत्पादन चक्र के कारण किसानों का कर्जमुक्त होना असंभव है। इसी तरह आय की अनिश्चिता भी उन्हें कर्ज के चक्र से बाहर नहीं निकलने देती है।  इसलिए कर्ज माफी मूल मुद्दों को हल किए बगैर अस्थायी समाधान प्रदान करती है, कुछेक सालों के अंतराल में किसानों को बार-बार इसकी जरूरत महसूस होती है। कर्ज माफी पर इस आंकड़े आधारित अध्ययन से नीति निर्माताओं, केंद्र व राज्य सरकारों व शोधार्थियों समेत सभी भागीदारों को मदद मिल सकती है। इसके आधार पर संकटग्रस्त किसानों की मदद के लिए ठोस नीति बनाने में आसानी होगी। अध्ययन का खर्च नाबार्ड ने उठाया है और भारत कृषक समाज के अधीन इसे डॉ. श्वेता सैनी, सिराज हुसैन व डॉ. पुलकित खत्री ने किया है।

About Post Author

Subscribe to get news in your inbox