अब कनाडा की कंपनी ने बनाया नेजल स्प्रे, कहा, कोरोना रोकने में 99 प्रतिशत कारगर

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August 26, 2026

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अब कनाडा की कंपनी ने बनाया नेजल स्प्रे, कहा, कोरोना रोकने में 99 प्रतिशत कारगर

-कंपनी का दावा-भारत के लिए गेमचेंजर हो सकता है हमारा नेजल स्प्रे

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/कनाडा/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/भावना शर्मा/- अब यह सिद्ध हो गया है कि कोरोना को रोकने के लिए वैक्सीन ही एक मात्र विकल्प है। जिसे देखते हुए अब सभी देश अपने यहां वैक्सीनेशन को बढ़ावा दे रहे हैं लेकिन अब पूरी दुनिया में वैक्सीन को लेकर मारा मची हुई है। हालांकि विश्व में कई कंपनियां वैक्सीन का निर्माण कर रही है। खुद भारत में कोविशिल्ड व कोवैक्सीन कोरोना के टीके बना रही हैं। लेकिन फिर भी भारत जैसी बड़ी आबादी वाले देश में इतनी जल्दी सभी को वैक्सीन नहीं लगाई जा सकती। इस बीच कनाडा की कंपनी सेनोटाइज का एक नेजल स्प्रे पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बना हुआ है। सेनोटाइज का दावा है कि यह नेजल स्प्रे ब्रिटेन और न्यूजीलैंड में क्लिनिकल ट्रायल की प्रॉसेस से गुजर चुका है, जिसमें यह 99 फीसदी कारगर रहा। हालांकि भारत भी नेजल स्प्रे बना रहा है और उसका भी ट्रायल दौर चल रहा है।
                       कंपनी का दावा है कि भारत जैसे घनी आबादि वाले देश में यह वैक्सीन कोरोना के खिलाफ गेम चेंजर का काम कर सकती है। कंपनी सेनोटाइज की फांउडर गिली रेगेवे का कहना है कि भारत मंे यह वैक्सीन कब आयेगा और इसकी कीमत क्या होगी, यह कहना अभी मुश्किल है लेकिन भारत में हम किसी पोटेंशियल पार्टनर की तलाश कर रहे हैं। कई कंपनियों ने इंटरेस्ट शो किया है। कुछ बहुत बड़ी फार्मास्यूटिकल कंपनियों के साथ बहुत एडवांस स्टेज में हमारी बातचीत चल रही है। हम अभी उनका नाम नहीं बता सकते, लेकिन मुझे लगता है बहुत जल्द हमें हमारा पार्टनर मिल जाएगा। इसके बाद भारत में अप्रूवल लेने की प्रक्रिया शुरू होगी। तो मैं बस इतना ही कहूंगी कि भारत में सेनोटाइज नेजल स्प्रे बहुत जल्द पहुंच जाएगा। यह हमारे भारतीय पार्टनर कंपनी पर निर्भर करेगा कि वह इसे कैसे और सबसे पहले कहां पहुंचाना पसंद करेगी।
                   उन्होने नेजल स्प्रे के प्रभाव पर कहा कि यह दावा हवा हवाई नही है बल्कि टेस्ट के नतीजों पर आधारित है। नेजल स्प्रे की टेस्टिंग हमने अपनी लैब में करने के बाद इसके मैन्युफैक्चरिंग फॉर्मूले को यूएसए की उटा यूनिवर्सिटी में भेजा। वहां यूनिवर्सिटी के एंटी वायरल इंस्टीट्यूट ने लैब टेस्ट करने के बाद इसे 99 नहीं बल्कि 99.9 प्रतिशत प्रभावी बताया। उन्होने बताया कि यूके में क्लिनिकल ट्रायल हुआ है। ट्रायल के दौरान एफिकेसी रेट बहुत स्ट्रॉन्ग पाई गई। हमने पाया कि यूके वैरिएंट यानी कोरोना वायरस में हुए म्यूटेशन या कह सकते हैं कि उसके रूप बदलने के बाद चर्चा में आए बेहद घातक वैरिएंट को खत्म करने में यह नेजल स्प्रे बहुत प्रभावी रहा। हमने प्रॉसेस शुरू कर दी है, उम्मीद है जल्द ही अप्रूवल मिल जाएगा। कनाडा में सेफ्टी ट्रायल हमने किया है। अब कनाडा में फेज-3 यानी अंतिम चरण का ट्रायल चल रहा है। इजराइल और न्यूजीलैंड ने इसे मेडिकल इमरजेंसी में इस्तेमाल के लिए स्वीकृति दे दी है।
                    उन्होने कहा कि इस नेजल स्प्रे की सबसे खास बात यह है कि यह जिस केमिकल से बना है, वह हमारी बॉडी के हर हिस्से में पहले से मौजूद है। यह नेजल स्प्रे नाइट्रिक ऑक्साइड से बना है। यह केमिकल कंपोनेंट पहले से ही हमारे शरीर के हर सिस्टम में मौजूद होता है, लिहाजा मानव शरीर को इसके साथ एडजेस्ट करने में किसी भी तरह की दिक्कत पेश नहीं आएगी। नाइट्रिक ऑक्साइड एंटी इफेक्टिव माइक्रोबियल यानी बैक्टीरिया और वायरस की ग्रोथ को रोकने वाला केमिकल है। यह किसी भी हैंड सैनेटाइजर की तरह ही काम करता है। जैसे ही हम नेजल स्प्रे लेते हैं, वैसे ही यह सबसे पहले नाक में एक बैरियर क्रिएट करता है। यह बैरियर नॉन स्पेसिफिक वायरस को ताबड़तोड़ तरह से मारता है। एक तरफ बैरियर की वजह से वायरस मरते हैं। दूसरी तरफ यह नाइट्रिक ऑक्साइड नाक में मौजूद रिसेप्टर्स की कोशिकाओं में वायरस के प्रवेश को ब्लॉक कर देता है। जिसकारण यह कोरोना पर 99 प्रतिशत कारगर है।
                       उन्होने कहा कि यह कोरोना पर दोहरी मार करता है और इसे वैक्सीन से पहले या वैक्सीन के बाद भी लिया जा सकता है। लेकिन वैक्सीनेशन पर उन्होने कहा कि वैक्सीन जरूर लगवानी चाहिए। लेकिन क्योंकि मैं यह मानकर चलती हूं कि भारत ही नहीं कई और देश हैं जहां पर इतनी जल्दी वैक्सीनेशन सबके लिए संभव नहीं होगा, ऐसी स्थिति में नेजल स्प्रे असरकारक होगा।

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