अपनी संस्कृति से जुड़ना ही शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि -नरेंद्र आहुजा विवेक

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August 25, 2026

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अपनी संस्कृति से जुड़ना ही शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि -नरेंद्र आहुजा विवेक

-महर्षि दयानंद क्रांतिकारियों के प्रेरणा सोत्र रहे-आचार्य अखिलेश्वर भारद्वाज -“शहीदों के स्वपनों का भारत“ पर गोष्ठी सम्पन्न

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नई दिल्ली/भावना शर्मा/- केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के तत्वावधान में 91 वे बलिदान दिवस पर “शहीदों के सपनो का भारत“ विषय पर ऑनलाइन गोष्ठी का आयोजन किया गया। आज कोरोना काल 22 मार्च 2020 की दूसरी वर्षगाँठ पर परिषद ने 375 वेबिनार पूरे कर लिए।
                  मुख्य वक्ता नरेंद्र आहुजा विवेक (पूर्व राज्य ओषधि नियंत्रक हरियाणा) ने कहा कि अपनी जड़ों से जुड़ना ही शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि है। बिना अपनी संस्कृति की रक्षा के कोई राष्ट्र आगे नहीं बढ़ सकता। उन्होंने कहा कि क्रांतिकारियों के बलिदान दिवस को मनाने के लिए हमें राष्ट्र के स्वाधीनता संग्राम में अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले क्रांतिकारियों के सपनों का राष्ट्र बनाने का संकल्प लेना चाहिए। इस संकल्प को हम सही ढंग से पूर्ण कर पाएं इसके लिए राष्ट्र और स्वाधीनता के सही अर्थ को समझना होगा। हमारा राष्ट्र वेदों में परिभाषित किया गया है और ऋग्वेद के दशम मण्डल के मन्त्र में राष्ट्र को ऋषियों की ऋतम्भरा प्रतिभा की खोज बताया गया है जो यज्ञों के फल को जन जन तक पहुंचाने वाली है। स्वाधीनता का अर्थ हम स्वयं अपने लिए अपने द्वारा बनाए गए नियमों के संविधान के अंतर्गत रहें। कोई पेड़ कितना भी बड़ा पुराना वट वृक्ष क्यों ना हो जब अपनी संस्कृति की जड़ों से कट जाता है तो खाद पानी ना मिलने के कारण बाह्य हवा के झोंकों से ठूंठ बनकर गिर पड़ता है। इसलिए हमें शहीदों के सपनों का राष्ट्र बनाने के लिए अपनी पुरातन सनातन वैदिक संस्कृति की जड़ों से जुड़े रहना होगा।
                 वैदिक विद्वान आचार्य अखिलेश्वर जी (आनंदधाम आश्रम, हरिद्वार) ने कहा कि महर्षि दयानंद क्रांतिकारियों के सिरमौर थे उनसे प्रेरणा लेकर अनेको नोजवान आजादी की लड़ाई में कूद पड़े। अध्यक्ष डॉ.जयदीप आर्य (केन्द्रीय प्रभारी,पतंजलि योगपीठ हरिद्वार) ने कहा कि अभी आजादी अधूरी है शहीदों के स्वपनो का भारत बनाने के लिए अभी बहुत काम करने की आवश्यकता है। केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य ने कहा कि जब तक समाज में भृष्टाचार, पाखंड, अंधविश्वास व असमानता है तब तक शहीदों के स्वपनो का भारत नहीं बन सकता है। राष्ट्रीय मंत्री प्रवीन आर्य ने शहीदों को पाठ्यक्रम में यथोचित स्थान देने की मांग उठाई। गायक रविन्द्र गुप्ता, दीप्ति सपरा, रजनी गर्ग, ईश्वर देवी, आशा आर्या, रेखा गौतम, प्रतिभा कटारिया, प्रवीना ठक्कर व अंजु आहुजा के मधुर भजन हुए।

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