
नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/बेल्जियम/नई दिल्ली/प्रदीप यादव/शिव कुमार यादव/भावना शर्मा/- बेल्जियम के लीग शहर के पास स्थित बायोटेक कंपनी कनेका यूरोजेंटेक अमेरिकी कंपनी इनोवियो के लिए कोरोना वायरस की वैक्सीन का उत्पादन करने की तैयारी कर रही है।
अपने अत्याधुनिक फर्मेंटर (किण्वक) में, यूरोजेंटेक कोविड-19 वैक्सीन आईएनओ-4800 का निर्माण करेगी। यह वैक्सीन न्यूक्लिक-एसिड आधारित होगी। हालांकि आगामी छह महीनों से पहले इसके बाजार में आने की संभावना नहीं है। कनेका यूरोजेंटेक के सीईओ लीवेन जानसेन ने कहा, वर्तमान में मौजूद अन्य कोरोना वैक्सीन के मुकाबले आईएनओ-4800 से ज्यादा फायदा होगा।
कमरे के तापमान पर एक साल रख सकेंगे
जानसेन ने कहा,श्यह वैक्सीन कमरे के तापमान पर एक वर्ष से अधिक समय के लिए स्थिर रह सकती है और यह एक जबरदस्त लाभ है। यदि आप विकासशील देशों या अफ्रीका, एशिया के मुल्कों में टीकाकरण शुरू करना चाहते हैं, तो इस वैक्सीन से आपको मदद मिलेगी। उन्होंने कहा, यह वैक्सीन अन्य वैक्सीनों के मुकाबले कमरे के तापमान पर स्थिर रह सकती है और इसके लिए आपको रेफ्रिजेरेटर की जरूरत नहीं होगी। गौरतलब है कि कम विकसित देशों में वैक्सीन को कम तापमान पर रखना चुनौतीपूर्ण बन रहा है।
बता दें कि इनोवियो एक जैवप्रौद्योगिकी कंपनी है जो संक्रामक रोगों और कैंसर से लोगों के इलाज और सुरक्षा के लिए बाजार में डीएनए वाली दवाओं को लाने पर काम कर रही है। वहीं, अब कंपनी यूरोजेंटेक के साथ मिलकर कोरोना वैक्सीन आईएनओ-4800 तैयार करने में जुटी हुई है। इनोवियो को अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) से वैक्सीन के दूसरे चरण के परीक्षण की अनुमति मिली है। इस परीक्षण को अमेरिका के रक्षा मंत्रालय द्वारा आर्थिक रूप से समर्थन दिया जा रहा है। इनोवियो दुनियाभर में वितरण के लिए लाखों आईएनओ-4800 वैक्सीन खुराक का उत्पादन करने के लक्ष्य के साथ वैक्सीन के निर्माण के लिए काम कर रहा है।
गौरतलब है कि ब्रिटेन ने फाइजर/बायोएनटेक द्वारा तैयार की गई वैक्सीन के जरिए अपने देश में टीकाकरण अभियान शुरू कर दिया है। हालांकि, इस वैक्सीन के रखरखाव को लेकर समस्या है, क्योंकि इसके भंडारण के लिए -70 डिग्री तापमान की जरूरत है। विकसित देशों और यूरोपीय मुल्कों में इस वैक्सीन के प्रयोग को लेकर ज्यादा चुनौती नहीं है, लेकिन दुनिया के कम विकसित देशों में इस वैक्सीन का भंडारण चुनौतीपूर्ण बन रहा है। ऐसे मे अगर आईएनओ-4800 वैक्सीन तैयार हो जाती है, तो इससे कम आय वाले देशों को कोरोना के खिलाफ बड़ी मदद मिलेगी।





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