मानव एकता दिवस: करुणा, प्रेम और सेवा का दिव्य संगम

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August 11, 2026

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-मानवता का संदेश लेकर आया विशेष आयोजन

उत्तराखंड/उमा सक्सेना/-   उत्तराखंड के ऋषिकेश सहित देशभर में संत निरंकारी मिशन द्वारा मानव एकता दिवस श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। यह आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रेम, सह-अस्तित्व और मानवता के मूल्यों को जीवन में उतारने का सशक्त संदेश बनकर सामने आया। इस अवसर पर “मानव को मानव हो प्यारा, एक-दूजे का बने सहारा” का संदेश हर दिल तक पहुंचा और लोगों को एकता की भावना से जोड़ गया।

महान संत की स्मृति में आयोजन
यह विशेष दिवस बाबा गुरबचन सिंह की पावन स्मृति में आयोजित किया गया, जिसमें सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज और निरंकारी राजपिता जी के सान्निध्य में दिल्ली में भव्य कार्यक्रम हुआ। देशभर के हजारों सत्संग केंद्रों पर भी श्रद्धालुओं ने इस दिन को सेवा और समर्पण के रूप में मनाया।

सेवा का अद्भुत उदाहरण: विशाल रक्तदान अभियान
संत निरंकारी मंडल के पदाधिकारियों के अनुसार इस अवसर पर पूरे देश में सैकड़ों स्थानों पर रक्तदान शिविर लगाए गए, जिनमें हजारों यूनिट रक्त एकत्र किया गया। यह पहल मानव सेवा और निस्वार्थ भाव का जीवंत उदाहरण बनी। वर्षों से जारी इस परंपरा ने समाज में सेवा और सहयोग की भावना को मजबूत किया है।

सेवा और एकता की निरंतर पहल
मानव एकता दिवस केवल एक दिन का आयोजन नहीं, बल्कि पूरे वर्ष चलने वाली सेवा गतिविधियों की शुरुआत माना जाता है। इसके तहत देशभर में सैकड़ों स्थानों पर रक्तदान और समाजसेवा के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिससे जरूरतमंदों को सहायता मिल सके और समाज में भाईचारे की भावना बनी रहे।

युवाओं को मिला सकारात्मक संदेश
ऋषिकेश में आयोजित सत्संग कार्यक्रम में वक्ताओं ने युवाओं को नशामुक्त जीवन अपनाने और अपनी ऊर्जा को समाजसेवा में लगाने का संदेश दिया। उन्होंने बताया कि सच्ची भक्ति वही है, जिसमें मानवता की सेवा और दूसरों के प्रति करुणा का भाव हो।

मानवता की सेवा ही सच्ची पूजा
इस आयोजन ने यह स्पष्ट किया कि जब इंसान अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर दूसरों के लिए जीता है, तभी सच्चे अर्थों में मानवता की स्थापना होती है। प्रेम, करुणा और सेवा का यह संदेश समाज को एक नई दिशा देने वाला साबित हुआ।

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