उत्तराखंड/उमा सक्सेना/- उत्तराखंड के ऋषिकेश स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश के छठे दीक्षांत समारोह में एक छात्र की असाधारण उपलब्धि ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। एमडी मेडिसिन के छात्र देवांग अग्रवाल को एक नहीं बल्कि सात स्वर्ण पदकों से सम्मानित किया गया। यह उपलब्धि देखकर समारोह में मौजूद सभी लोग आश्चर्यचकित रह गए और उनकी मेहनत की सराहना की गई।
मेहनत का मिला बड़ा फल
डॉ. देवांग अग्रवाल ने बताया कि उन्हें अपनी मेहनत के आधार पर एक स्वर्ण पदक मिलने की उम्मीद थी, लेकिन सात पुरस्कार मिलना उनके लिए पूरी तरह अप्रत्याशित रहा। उन्होंने कहा कि यह सम्मान उनके लिए गर्व का क्षण है और इससे उन्हें आगे और बेहतर कार्य करने की प्रेरणा मिलेगी।
बचपन का सपना हुआ साकार
राजस्थान के जयपुर में जन्मे देवांग ने बताया कि उन्होंने बचपन से ही डॉक्टर बनने का सपना देखा था। अपने क्षेत्र के एक चिकित्सक से प्रेरित होकर उन्होंने यह लक्ष्य तय किया और लगातार मेहनत के दम पर उसे हासिल किया। आज उनकी सफलता इस बात का प्रमाण है कि लगन और समर्पण से कोई भी लक्ष्य पाया जा सकता है।
कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित
दीक्षांत समारोह में उन्हें विभिन्न श्रेणियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए कई प्रमुख स्वर्ण पदकों से नवाजा गया। यह सम्मान उन्हें उनके शैक्षणिक उत्कृष्टता और निरंतर मेहनत के लिए दिया गया। इस मौके पर देश के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने उन्हें सम्मानित किया।
युवाओं के लिए प्रेरणा
डॉ. देवांग अग्रवाल ने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि सफलता पाने के लिए निरंतर मेहनत और समर्पण जरूरी है। उन्होंने कहा कि अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखें और समाज की सेवा के लिए हमेशा तत्पर रहें।
सफलता की मिसाल
उनकी यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे संस्थान और देश के लिए गर्व का विषय है। यह कहानी उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो अपने सपनों को साकार करना चाहते हैं।


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