RTI से खुलासा: 14 साल में 11.7 करोड़ मौतें, लेकिन UIDAI ने सिर्फ 1.15 करोड़ आधार नंबर किए रद्द

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August 25, 2026

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RTI से खुलासा: 14 साल में 11.7 करोड़ मौतें, लेकिन UIDAI ने सिर्फ 1.15 करोड़ आधार नंबर किए रद्द

अनीशा चौहान/-   भारत में आधार कार्ड को नागरिकों की पहचान का सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जाता है। लेकिन हाल ही में एक सूचना के अधिकार (RTI) के जवाब ने भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। RTI से पता चला है कि पिछले 14 सालों (2010-2024) में देश में अनुमानित 11.7 करोड़ लोगों की मौत हुई। लेकिन अभी तक सिर्फ 1.15 करोड़ आधार नंबर ही निष्क्रिय किए गए। यह आंकड़ा मृत्यु दर की तुलना में मात्र 10% है। जिससे आधार डेटाबेस की विश्वसनीयता और अपडेट प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे है।

RTI से सामने आए चौंकाने वाले तथ्य
नागरिक पंजीकरण प्रणाली (CRS) के आंकड़ों की मानें तो भारत में साल 2007 से 2019 के बीच हर साल औसतन 83.5 लाख लोगों की मौतें दर्ज की गई हैं। इस आधार पर, पिछले 14 सालों में कुल 11.69 करोड़ से ज्यादा मौतें हो चुके है। इसके बावजूद, UIDAI ने 31 दिसंबर 2024 तक केवल 1.15 करोड़ आधार नंबर ही मौत के आधार पर निष्क्रिय किए।

इसका मतलब है कि 90% से ज्यादा मृतकों के आधार नंबर अभी भी सक्रिय हो सकते हैं। वहीं, जब RTI में पिछले पांच सालों में साल-दर-साल निष्क्रिय किए गए आधार नंबरों का विवरण मांगा गया, तो UIDAI ने स्पष्ट किया कि उनके पास ऐसी कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है। यह जवाब आधार डेटाबेस की निगरानी और पारदर्शिता की कमी को दर्शाता है।

मृतकों के आधार नंबरों का सक्रिय रहने से समस्या
बता दें, मृतकों के आधार नंबरों का सक्रिय रहना कई गंभीर समस्याओं को जन्म दे सकता है:

पहचान की धोखाधड़ी: सक्रिय आधार नंबरों का उपयोग फर्जी पहचान बनाने, बैंक खातों की KYC पूरी करने या अन्य अवैध गतिविधियों के लिए किया जा सकता है।

सरकारी योजनाओं में गड़बड़ी: राशन, पेंशन, LPG सब्सिडी, और छात्रवृत्ति जैसी योजनाओं में मृतकों के नाम पर दुरुपयोग की आशंका बढ़ जाती है।

वित्तीय धोखाधड़ी: मृत व्यक्तियों के आधार का उपयोग करके बैंक खातों में लेनदेन या साइबर ठगी की घटनाएं संभव हैं।

निष्क्रियकरण प्रक्रिया की जटिलता
संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष के अनुसार, अप्रैल 2025 तक भारत की जनसंख्या 146.39 करोड़ है, जबकि आधार धारकों की संख्या 142.39 करोड़ है। जो यह दर्शाता है कि देश की लगभग 97% आबादी के पास आधार कार्ड है। लेकिन इतनी बड़ी संख्या में सक्रिय आधार नंबरों में मृतकों के कार्ड शामिल होने से डेटा की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं।

UIDAI ने स्वीकार किया है कि आधार नंबर निष्क्रिय करने की प्रक्रिया जटिल है। मृत्यु प्रमाणपत्र के आधार पर परिजनों को UIDAI को सूचित करना होता है, लेकिन इस प्रक्रिया में कई बाधाएं हैं, जैसे – कई परिवार, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में, मृत्यु के बाद आधार निष्क्रिय करने की प्रक्रिया से अनजान हैं। UIDAI के पास मृतकों के सक्रिय आधार नंबरों की निगरानी के लिए कोई समर्पित तंत्र नहीं है।

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