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अधिकारिक रूप से भारत आर्थिक मंदी की चपेट में

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/द्वारका/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/भावना शर्मा/- भारत अब आधिकारिक रूप से आर्थिक मंदी में चला गया है। दरअसल किसी भी देश में जब लगातार दो तिमाहियों तक सकल घरेलू उत्पाद (ळक्च्) की ग्रोथ में गिरावट आती है तो उसे मंदी या रिसेशन मान लिया जाता है। शुक्रवार को जुलाई-सितंबर की दूसरी तिमाही में भारत की जीडीपी में 7.5ः की गिरावट रही है। अब जीडीपी का अगला आंकड़ा 26 फरवरी 2021 को आएगा।
बता दें कि इससे पहले अप्रैल-जून की तिमाही में भारत की ळक्च् में 23.9ः की गिरावट दर्ज की गई थी। इसी के साथ जीवीए भी 7ः गिरा है। हालांकि यह पहले से ही अनुमानित था कि दूसरी तिमाही में भी जीडीपी गिरेगी और भारत आधिकारिक रूप से मंदी में चला जाएगा। देश के केंद्रीय बैंक भारतीय रिजर्व बैंक ने पहले ही कहा था कि टेक्निकली हम रिसेशन के दौर में हैं। इस टेक्निकली को आज दूसरी तिमाही के जीडीपी के नतीजे ने साबित कर दिया। हालांकि आरबीआई का अनुमान कुछ हद तक सही था, लेकिन बाकी सभी अनुमान जीडीपी के वास्तविक आंकड़े से काफी ज्यादा थे। जीडीपी में चैंकाने वाली बात यह रही है कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने अच्छा प्रदर्शन किया है। इसमें मामूली ग्रोथ दिखी है। हालांकि निजी खपत में 11.5ः की भारी गिरावट आई है जो काफी निराशाजनक बात है। अब ऐसा माना जा रहा है कि निजी खपत या खर्च में अभी भी रफ्तार पकड़ने में समय लगेगा।
जीडीपी के आंकड़ों से पता चलता है कि भले ही गिरावट रही हो, लेकिन जो हाई फ्रिक्वेंसी इंडीकेटर्स हैं, उसमें काफी सुधार दिख रहा है। इलेक्ट्रिसिटी, गैस, पानी की सप्लाई और अन्य युटिलिटीज सेवाओं में 4.4ः की ग्रोथ दिखी है। एग्रीकल्चर, फॉरेस्टी और फिशिंग सेक्टर की ग्रोथ 3ः से ज्यादा रही है। ट्रेड और होटल में 15ः की गिरावट दर्ज की गई है। पब्लिक खर्च, रक्षा और अन्य सेवाओं में 12ः की गिरावट आई है। फाइनेंशियल, रियल इस्टेट और प्रोफेशनल सेवाओं के सेक्टर में 8.1ः गिरावट आई है।
वहीं अब माना जा रहा है कि इकोनॉमी रिकवरी के रास्ते पर है और यह तीसरी तिमाही में या चैथी तिमाही में पॉजिटिव रह सकती है। दूसरी तिमाही में जो सुधार दिखा है उसका असर तीसरी तिमाही में दिखेगा। तीसरी तिमाही में त्यौहारी सीजन का योगदान अच्छा रह सकता है। क्योंकि अक्टूबर और नवंबर में काफी खर्च लोगों ने किया है। अक्टूबर में ळैज् कलेक्शन 1.05 लाख करोड़ रुपए रहा है। नवंबर में यह 1.08 लाख करोड़ रुपए हो सकता है।
दूसरी तिमाही की जीडीपी हमारे अनुमान से बेहतर है। ज्यादातर सेगमेंट में ग्रोथ अनुमान के मुताबिक है। मैन्युफैक्चरिंग और ट्रेड सेक्टर की ग्रोथ चैंकाने वाली है। इससे आगे सुधार की उम्मीद दिख रही है। सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार के.वी. सुब्रमणियन ने कहा कि एग्रीकल्चर सेक्टर ने बेहतर प्रदर्शन किया है। गांवों में बढ़ रही मांग का असर ट्रैक्टर की बिक्री में दिख रहा है। उन्होंने कहा कि इकोनॉमी में सुधार अगले हफ्ते ब्याज दरों के फैसले से पहले आया है। खाद्य महंगाई दर के बारे में अनुमान है कि यह तीसरी तिमाही में कम रहेगी।

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