नई दिल्ली/सिमरन मोरया/- भारतीय संगीत जगत में न जाने कितने सिंगर आए और गए. लेकिन फिल्म इंडस्ट्री में संगीत को एक नई दिशा देने वाली गायिका आशा भोसलें ने अपने निजी और पारिवारि संघर्षों का सामना कर एक अलग दिशा दी है. संघर्ष और मेहनत को अक्सर फिल्मों में देखा जाता है लेकिन आशा ताई का जीवन भी किस फ़िल्मी दुनिया से कम नहीं था. आज भले ही पूरी दुनिया उनकी आवाज की दीवानी हो, लेकिन उनके जीवन की शुरुआत दौर बहुत कठिन और चुनौतियों से भरा हुआ था. उनका बचपन दुखों के साय में पला. केवल 16 साल की उम्र में परिवार के खिलाफ जा कर शादी करने वाली आशा ताई को अपनी शादी शुदा जिंदगी में भी कभी सुख प्राप्त नहीं हुआ. आर्थिक और पारिवारिक संघर्षों का सामना कर आशा ताई ने अपने जीवन में नए करियर की शुरुआत की. उन्होंने अपनी कोयल जैसी सुरीली और मधुर आवाज से 12,000 से अधिक गानों को अपनी आवाज देकर संगीत की दुनिया में एक ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया, जिसे तोड़ पाना मुश्किल ही नहीं बल्कि नामुमकिन नजर आता है.
आशा ताई और आरडी बर्मन की कहानी:
1993 में रिकॉर्ड एक बातचीत में आशा ताई और बर्मन ने अपनी प्रेम कहानी के बारे में बताया.आशा ताई अपनी पहली शादी से 3 बच्चों की माँ थी लेकिन पति के दुर्व्यवहार से वह अलग होगी थी और बर्मन की पहली शादी भी असफल रही. आशा ताई ने अपने रिश्ते के बारे में खुलकर बताया की वह दोनों कोई नासमझ नहीं थे. उन्हें अच्छे और बुरे दोनों की परख थी.
आशा भोसलें और बर्मन के रिश्ते की शुरुआत उनके काम से हुई थी. वह दोनों एक दूसरे को बहुत अच्छे से समझते थे और धीरे-धीरे दोस्ती का रिश्ता कब शादी में बदल गया. आरडी बर्मन बिना बताए आशा जी को फूल भेजते थे, लेकिन एक दिन साथ में रिकॉर्डिंग करने से आशा जी को पता लग गया की उन्हें फूल कोई ओर नहीं बल्कि बर्मन जी भेजते थे. यह उनकी ख़ुशी के पल का एक हिस्सा था, जिसे आशा भोसलें कभी ख़त्म नहीं करना चाहती थी और उन्होंने आरडी बर्मन को शादी के लिए हाँ करदी थी.
आशा भोसलें ने संगीत जगत को दी नई दिशा:
आशा ताई का जन्म 8 सितम्बर 1933 को हुआ था. परिवार में शुरू से ही संगीतिये नाटक देखा था लेकिन आशा भोसलें भी संगीत की दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बनाएगी, ये बात कुछ मीलों दूर तक थी. आशा के पिताजी स्वर्गीय श्री दिन नाथ मंगेश्कर जी की गायिकी में अपनी एक अलग पहचान थी. आशा जी को अपने घर में छोटी होने की वजह से ढ़ेर सारा लाड और प्यार मिलता था. बहन लता मंगेशकर के साथ घर पर ही पढाई शुरू करि और संगीत में दोनों बहनों ने अपनी एक पहचान बनाई. पिता के स्वर्गवास के बाद आशा जी ने 16 साल की उम्र में शादी का फैसला लिया और गणपतराव भोसलें से शादी कर प्लेबैक सिंगिंग के मैदान में उतर गई. ये वो दौर था जब शमशाद बेगम, गीता दत्त और लता मंगेशकर बड़ी ऊचाइयों पर थी. ऐसे में संगीत की दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बनाना आशा जी के लिए किसी चुनौती से काम नहीं था. तब महान संगीतकार सचिन देव बर्मन और ओ. पी. नय्यर ने आशा जी की आवाज को बहुत सारे गांव में इस्तेमाल किया और फिर ये साबित होगी गया कि आशा भोसलें भी किसी गायिका से काम नहीं है. इसी से आशा जी ने संगीत में कदम रखा. म्यूजिक डायरेक्टर सज्जाद हुसैन की सहायता से ”भवरा बड़ा नादान” गाने को सफल बनाया। धीरे- धीरे दो समय भी आया जब बड़ी से बड़ी हीरोइन भी आशा जी की आवाज के लिए तरसती थी. उनका पहला हिंदी फिल्मी गाना 1948 में फिल्म चुनरिया का “सावन आया” था.
प्रतिष्ठित अवार्ड्स आशा भोसलें जी के नाम:
मशहूर गायिका आशा भोसले ने 20 अलग भाषाओँ में 20,000 हज़ार से अधिक गाने संगीत की दुनिया अपने नाम दर्ज किए. आशा भोसलें को भारतीय संगीत में उनके अद्वितीय योगदान के लिए कई प्रतिष्ठित पुरस्कार मिले हैं, जिनमें 2008 में पद्म विभूषण, 2000 में दादासाहेब फाल्के पुरस्कार, और 7 फिल्मफेयर पुरस्कार शामिल हैं। उन्हें 2011 में 20 से अधिक भाषाओं में 11,000 से अधिक गाने रिकॉर्ड करने के लिए गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स द्वारा मान्यता प्राप्त है।


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