भविष्य में शांति की बड़ी जिम्मेदारी निभा सकता है भारत

स्वामी,मुद्रक एवं प्रमुख संपादक

शिव कुमार यादव

वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी

संपादक

भावना शर्मा

पत्रकार एवं समाजसेवी

प्रबन्धक

Birendra Kumar

बिरेन्द्र कुमार

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आईटी प्रबंधक

Categories

August 2026
M T W T F S S
 12
3456789
10111213141516
17181920212223
24252627282930
31  
August 24, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

-जर्मनी में बोले राजनाथ सिंह

नई दिल्ली/उमा सक्सेना/-  भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जर्मनी दौरे के दौरान पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ईरान से जुड़े संकट पर भारत की नीति को स्पष्ट करते हुए कहा कि भारत ने हमेशा संतुलन और समझदारी के साथ अपनी विदेश नीति को आगे बढ़ाया है। बर्लिन में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत किसी भी अंतरराष्ट्रीय संघर्ष में जल्दबाजी से कदम नहीं उठाता, बल्कि सही समय और सही परिस्थिति का इंतजार करता है। उन्होंने संकेत दिए कि आने वाले समय में भारत शांति बहाली और मध्यस्थता की दिशा में बड़ी भूमिका निभा सकता है।

पश्चिम एशिया संकट पर भारत का संतुलित रुख
राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत का नजरिया हमेशा शांति और संवाद पर आधारित रहा है। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में जो हालात बने हुए हैं, उस पर भारत लगातार नजर बनाए हुए है और सरकार सभी पक्षों के साथ संपर्क में है। रक्षा मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संघर्ष में शामिल देशों से युद्ध रोकने और बातचीत का रास्ता अपनाने की अपील की है। उनका मानना है कि भारत किसी एक पक्ष के साथ खड़े होने के बजाय शांति और स्थिरता को प्राथमिकता देता है।

प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति का किया उल्लेख
अपने संबोधन में रक्षा मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति की सराहना करते हुए कहा कि भारत ने बीते वर्षों में दुनिया के कई बड़े संकटों के दौरान अपनी अलग पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध से लेकर पश्चिम एशिया तक, प्रधानमंत्री मोदी ने कई वैश्विक नेताओं से सीधे बातचीत कर समाधान का रास्ता निकालने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि भारत की यही नीति उसे विश्व मंच पर एक भरोसेमंद और जिम्मेदार देश बनाती है।

राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत की विदेश नीति किसी के खिलाफ नहीं है। यही वजह है कि अमेरिका भी भारत पर भरोसा करता है और ईरान भी भारत को सम्मान की नजर से देखता है। उन्होंने कहा कि भारत का उद्देश्य हमेशा दुनिया में स्थिरता और शांति कायम करना रहा है।

होर्मुज जलडमरूमध्य का भी किया जिक्र
रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की संतुलित कूटनीति का असर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साफ दिखाई देता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जब पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर था, तब भी भारत के जहाज सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरते रहे। जबकि कई अन्य देशों को वहां मुश्किलों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि यह भारत की मजबूत और संतुलित विदेश नीति का परिणाम है।

जर्मनी के साथ मजबूत हो रहे रिश्ते
राजनाथ सिंह ने बताया कि यह उनका पहला जर्मनी दौरा है और वे वहां के रक्षा मंत्री के निमंत्रण पर पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि भारत और जर्मनी के बीच रिश्ते लगातार मजबूत हो रहे हैं और दोनों देशों के संबंध लोकतांत्रिक मूल्यों और साझा हितों पर आधारित हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2026 दोनों देशों के लिए बेहद खास है, क्योंकि इसी साल भारत और जर्मनी के कूटनीतिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे हो रहे हैं।

व्यापार और निवेश में भी बढ़ रहा सहयोग
रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत और जर्मनी के बीच केवल राजनीतिक और रणनीतिक रिश्ते ही नहीं, बल्कि आर्थिक सहयोग भी तेजी से बढ़ा है। उन्होंने बताया कि जर्मनी आज यूरोप में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन चुका है। भारत में दो हजार से अधिक जर्मन कंपनियां काम कर रही हैं, जो ‘मेक इन इंडिया’ और औद्योगिक विकास को नई गति दे रही हैं। वहीं कई भारतीय कंपनियां भी जर्मनी में अपने कारोबार का विस्तार कर रही हैं।

भारत निभा सकता है निर्णायक भूमिका
अपने संबोधन के अंत में राजनाथ सिंह ने कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है और ऐसे समय में भारत की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भारत न केवल अपने हितों की रक्षा करेगा, बल्कि वैश्विक शांति और स्थिरता कायम करने में भी अहम भूमिका निभाएगा।

About Post Author

आपने शायद इसे नहीं पढ़ा

Subscribe to get news in your inbox